संक्रमण के कारण होने वाली बीमारियों का होगा इलाज, बुरे बैक्टीरिया की पहचान होगी आसान

वैज्ञानिकों ने शरीर में विभिन्न बैक्टीरियाओं के कारण फैलने वाले संक्रमण और उनसे होने वाली बीमारियों से इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण खोज की है। वैज्ञानिकों ने एक नई विधि विकसित की है, जिसके माध्यम से शरीर में मौजूद खराब बैक्टीरियाओं की आसानी से पहचान कर उन्हें खत्म किया जा सकता है। उनका दावा है कि यह तकनीक जीन एडिटिंग की क्रिस्पर (सीआरएसपीआर) तकनीक को और अधिक कारगर बनाती है। इससे मानव शरीर में मौजूद माइक्रोबायोम की संरचना को व्यक्ति के अनुकूल किया जा सकता है।

माइक्रोबायोम किसी मनुष्य के शरीर में मौजूद जीवित प्रोटोजोआ, बैक्टीरिया, वायरस आदि सूक्ष्म जीव होते हैं। हजारों की संख्या में हमारे शरीर के भीतर रहने वाले इन जीवों का हमारी सेहत पर अच्छा और बुरा दोनों तरह का असर पड़ता है। नई तकनीक से अब हम शरीर से खराब बैक्टीरिया को खत्म कर सकते हैं और यह तय कर सकते हैं कि हमारे शरीर में कौनकौन से जीव रहें। नेचर कम्युनिकेशंस नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है नई क्रिस्पर तकनीक के जरिये मनुष्य के माइक्रोबायोम को दुरुस्त करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

बदले जा सकेंगे कोशिकाओं के जीन

कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारियो के शोधकर्ताओं ने कहा, ‘आनुवांशिक (जीन) कोड के विशिष्ट हिस्सों को लक्षित करने और सटीक स्थानों पर डीएनए को एडिट करने के लिए क्रिस्पर को प्रोग्राम किया जा सकता है, जिससे शोधकर्ताओं को जीवित कोशिकाओं के जीन को स्थायी रूप से बदलने में मदद मिल सकती है और इससे हम बैक्टीरिया को भी मार सकते हैं।’

अब तक विशेष बैक्टीरिया को मार नहीं पाती थी क्रिस्पर

शोधकर्ताओं ने कहा कि अब तक विशेष प्रकार के बैक्टीरिया को लक्षित करने का हमारे पास कोई तरीका नहीं था और ऐसा भी नहीं है कि क्रिस्पर तकनीक के जरिये पहली बार कोशिकाओं और जीवों को लक्षित किया जा रहा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस तकनीक में सबसे बड़ी समस्या यह थी कि शरीर में मौजूद विशेष प्रकार की कोशिकाओं और जीवों का कैसे मारा जाए। उन्होंने दावा किया कि नए अध्ययन में हमने इस समस्या का समाधान खोज लिया है।

शरीर के हर हिस्से में पहुंच सकती है दवा

यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारियो के शोधकर्ता और इस अध्ययन के सह- लेखक बोगुमिल कारास ने कहा, ‘अन्य तकनीकों में दवाओं के वितरण के लिए बनी प्रणालियां केवल कुछ स्थानों तक ही जा पाती हैं, पर हमारी तकनीक के जरिये शरीर के किसी भी हिस्से तक दवाओं को पहुंचाया जा सकता है।’ शोधकर्ताओं ने कहा कि बैक्टीरिया को मारने के लिए नई तकनीक स्टैफिलोकोकस ऑरियस (स्टैफ ए) और एस्चेरिचिया कोली (ई-कोली) जैसी पारंपरिक एंटीबायोटिक दवाओं का एक विकल्प हो भी सकता है।

डीएनए बदल कर करता है हमला

शोधकर्ताओं ने कहा कि नई वितरण प्रणाली ऐसी क्षमता है जो क्रिस्पर की मदद से स्वयं ही बैक्टीरिया को बदल सकती है। एक बार लक्षित स्थान पर जीन एडिटिंग उपकरण जब पहुंच जाता है तो यह अपने डीएनए में परिवर्तन कर बैक्टीरिया को मारना शुरू कर देता है।

अगली पीढ़ी का एंटीमाइक्रोबायोम एजेंट

शोधकर्ताओं ने कहा कि क्रिस्पर का प्रयोग अगली पीढ़ी के एंटीमाइक्रोबायोम एजेंट के रूप में भी हो सकता है, जो उन बैक्टीरियाओं पर भी असर करेगा जो एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोधी बन जाते हैं। कारास ने कहा, ‘इस तकनीक का इस्तेमाल प्रोटीन की कमियों के कारण होने वाले रोगों के इलाज के लिए भी किया जा सकता है।