
आज यानी 5 सितंबर को टीम इंडिया के स्टार स्पिनर प्रज्ञान ओझा अपना 33वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं. आज उनके जन्मदिन के दिन उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण जानकारी आपको देने जा रहे है. वेैसे उन्हे भारतीय क्रिकेट टीम में जेंटलमैन्स गेम कहा जाता है, लेकिन इसमें भी खिलाड़ी के गंभीर रूप से चोटिल होने का खतरा लगातार बना रहता है. कुछ ऐसा ही खतरा दो साल पहले प्रज्ञान ओझा को भी झेलना पड़ा था. ईश्वर की कृपा से वे बच निकले.

यह मामला 2012 में हुए टीम इंडिया के श्रीलंका टूर पर घटा था. अपने साथी खिलाड़ियों संग वनडे मैच से पहले कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में ओझा अभ्यास कर रहे थे. नेट प्रैक्टिस के दौरान एक बल्लेबाज का शॉट उनकी गर्दन पर लगा. गेंद टकराते ही ओझा दर्द से कराह उठे और घबराकर जमीन पर बैठ गए. उनकी हालत देखकर फिजियो और साथी खिलाड़ी भी चिंता में पड़ गए थे.
ओझा को तुरंत कोलंबो के लंका हॉस्पिटल में चेक-अप के लिए भर्ती करवाया गया. डॉक्टर ने उनकी जांच करने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी। डॉक्टर्स ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया था कि यदि गेंद की रफ्तार थोड़ी भी अधिक होती तो ओझा की चोट गंभीर हो सकती थी. बता दे कि गले के दाहिने तरफ ‘जगलर वेन’ नाम की नस होती है जो दिल को दिमाग से जोड़ती है. इस नस पर जरा भी दबाव पड़ने से दिमाग पर असर पड़ता है. इसी नस के दबने से फांसी लगने के समय इंसान की मृत्यु होती है. गेंद लगने से ओझा की उसी नस के दबने या उसे क्षति पहुंचने का बड़ा खतरा था.