विकास हत्याकांड में दो महिलाओं सहित चार आरोपी भेजे गए जेल

हरपालपुर। हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत कस्बे में मकान में कब्जेदारी के विवाद में हुई दुकानदार की हत्या के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए चार आरोपियों को शुक्रवार को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।

हरपालपुर कस्बा निवासी विकास मिश्रा (45) पुत्र महेंद्र मिश्रा चाय पकौड़ी की दुकान लगाते थे। मकान पर कब्जेदारी के विवाद में उनके घर में गुरुवार सुबह छह बजे 14 लोगों ने धावा बोल दिया था। हमलावरों ने विकास की लाठियों से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी, जबकि उसकी पत्नी सुधा और पुत्र अंकित को भी पीटा था। सुधा और अंकित को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इस मामले में पुलिस ने विकास के साले रतिराम की तहरीर पर ग्राम ईसेपुर निवासी वीरेश, सतेंद्र, दुष्यंत और संजय पुत्रगण पातीराम, संगीता पत्नी संजय, विद्यावती पत्नी विश्राम, रामबाबू और श्यामबाबू पुत्रगण अमर सिंह, वेदप्रकाश पुत्र खुमानी निवासी सांडी पर नामजद और पांच अज्ञात लोगों पर लूट, हत्या और बलवा की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। गुरुवार को घटना के बाद ही ग्रामीणों की भीड़ ने संगीता, विद्यावती और वेदप्रकाश को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
देर रात पुलिस ने हत्यारोपियों में शामिल संगीता के पति संजय को भी गिरफ्तार कर लिया। एसपी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पोस्टमार्टम से जुड़े विश्वस्त सूत्रों की मानें तो विकास मिश्रा पर लाठी और डंडों से इतने वार किए गए कि उसके सिर की हड्डियों के तीन टुकड़े हो गए। दायें कंधे पर भी गंभीर चोटें आईं।
कोतवाली पुलिस की लापरवाही पर एसपी ने दिए जांच के आदेश
हरदोई।
हरपालपुर कस्बे में विकास मिश्रा की हत्या के मामले में कोतवाली पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवालों के बीच एसपी आलोक प्रियदर्शी ने सख्त रुख अपना लिया है। दरअसल विकास के घर पर जब हमला बोला गया तो वह घटनास्थल से 300 मीटर दूर कोतवाली भागकर गया और मदद मांगी। कोई जवाब न मिलने पर वह फिर दौड़कर मकान पर गया।
लगभग एक घंटे बाद कोतवाली से दो सिपाही मौके पर गए, लेकिन तब तक हमलावर विकास की पीट-पीटकर हत्या कर चुके थे। एसपी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। पुलिस अधीक्षक ने हरपालपुर कोतवाल व अन्य पुलिस कर्मियों की लापरवाही को लेकर जांच शुरू करा दी है। मामले की जांच सीओ हरपालपुर राकेश वशिष्ठ को सौंपी गई है। उधर सोशल मीडिया पर राजनीतिक दबाव में कोतवाल को बचाने की कवायद किए जाने पर भी तीखी टिप्पणियां हो रही हैं।