बकरीद का त्यौहार आते ही कुर्बानी के जानवरों की खरीद-फरोख्त शुरू हो जाती है ……

बकरीद का त्यौहार आते ही कुर्बानी के जानवरों की खरीद-फरोख्त शुरू हो जाती है और कुछ जानवर ऐसे भी होते हैं जो दुर्लभ माने जाते हैं ऐसा ही एक बकरा इन दिनों बुंदेलखंड के बांदा में धूम मचाए हुए हैं रैंबो नाम का यह बकरा ना सिर्फ वजन में ही सब पर भारी पावा है बल्कि इस बकरे की खूबसूरती के चर्चे पूरे बुंदेलखंड में लोगों की जबान पर हैं काजू बादाम किशमिश सेब कीनू खाकर अपने शबाब पर पहुंचा रैंबो पकड़ो का बकरों की दुनिया में रेसलर का मुकाम बना चुका है.

वीओ- जी हां साहब यह बकरा नहीं बकरों का शहंशाह है यह रैंबो है ओम उम्र 26 माह है वजन में यह 2 कुंटल 20 किलो पर कर चुका है और बकरीद के दिन कुर्बानी के लिए तैयार है बांदा के लकड़ी व्यवसाय इमरान टिंबर के मालिक रिजवान ने इस नया बकरे को मैदान में उतारा है रैंबो नाम से मशहूर यह बकरा राजस्थान की गुजरी नस्ल का है 42 इंच इसकी ऊंचाई है और इसकी डाइट ऐसी कि जो बड़े लखपति को भी नसीब नहीं रिजवान बताते हैं कि रैंबो को आज से डेढ़ साल पहले उन्होंने राजस्थान के जयपुर से ₹60000 का खरीदा था और तब इसकी उम्र सिर्फ 8 महीने की थी रैंबो को देखकर रिजवान के अजीज दोस्त अबरार खान गमन आ गया और उन्होंने इस बकरे को तैयार करने की जिद पकड़ ली रिजवान नहीं बकरे को उनके हवाले कर दिया और डेढ़ साल में बकरा विशेषज्ञ सूरत के अनुभव मिर्जा के शागिर्द अबरार खान ने 7 किलो के रैंबो को 220 किलो तक पहुंचा दिया रिजवान कहते है कि यह बकरा उनके लिए किसी तोहफे से कम नहीं है।

इस बकरे के तैयार करने में क्या मेहनत की और इस बकरे को किस तरह से तैयार किया यह भी अपने आप में एक बड़ी चुनौती है रिजवान बताते हैं कि बकरे को तैयार करने की प्रेरणा सूरत के बकरा विशेषक अनवर मिर्जा से मिली और इस बकरे को तैयार करने में अनवर मिर्जा की गाइडलाइन अहम है। बकरे को चना मेवे दूध और तमाम चीजें खिलाई जाती हैं इसके अलावा बहुत से देसी नुस्खे भी इसे दिए जाते रहे जिसके चलते यह कम वक्त में इतना वजनदार बनाया जा सका ।बहर हाल बुंदेलखंड के बांदा में इतना भारी बकरा पहली बार कुर्बानी के लिए तैयार किया गया है और इस बकरे को देखने के लिए लोग उमड़ रहे हैं।