
चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड मामले में उत्तराखंड ने केंद्र की राह से खुद को फिलहाल अलग कर लिया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को अवगत कराया है 2021-22 में इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स नहीं पढ़ाया जाएगा, लिहाजा किसी कॉलेज को एनओसी का सवाल नहीं है। सरकार के रुख के बाद चार वर्षीय बीएड में एडमिशन की उम्मीद पाले युवाओं को बड़ा धक्का लगा है।
दरअसल इसी साल 20 मई को नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजुकेशन की ओर से जॉब ओरिएंटेड चार वर्षीय बीएड को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया। एनसीटीई को राज्य सरकार ने कहा था रेगुलर बीएड कोर्स के स्थान पर इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स लागू करने को राजी हैं। इस कोर्स के लिए विश्विद्यालय, सरकारी व निजी बीएड कॉलेज को तीन जून से 31 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन राज्य सरकार की एनओसी के साथ करना था। राज्य में 101 बीएड कॉलेज द्वारा आवेदन के लिए राज्य सरकार से एनओसी देने को प्रार्थना पत्र दिया। जब एक सप्ताह में एनओसी नहीं मिली तो साई शिक्षण सस्थान जसपुर द्वारा याचिका दायर की गई तो कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगते हुए पूछा कि 48 घंटे में एनओसी देने में देरी क्यों की जा रही है।
वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ में मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट में दिया स्टेटमेंट दिया कि सरकार ने इस साल इस कोर्स को लागू नहीं करने का फैसला लिया है। लिहाजा किसी कॉलेज को एनओसी देने का सवाल नहीं है।