
मोदी सरकार 2.0 का पहला आम बजट कल शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाना है। आम बजट से एक दिन पहले संसद में पेश होने वाला इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) आज मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने संसद में प्रस्तुत कर दिया है।
इकोनॉमिक सर्वे 2018-19 के अनुसार, इस साल जनवरी से मार्च महीने के बीच मंदी का कारण चुनाव की अनिश्चितता रहा है। साथ ही कहा गया कि एनबीएफसी संकट के कारण विकास दर में कमी आई। सर्वे के अनुसार इन्वेस्टमेंट दर अपने निचले स्तर पर पहुंची है। इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2019 में फिस्कल डेफिसिट के 5.8 फीसद रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2018 में 6.4 फीसद पर था। सर्वे में कहा गया कि खाद्य सामग्री के दाम कम होने से किसानों ने उत्पादन कम किया है। इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि वैश्विक ग्रोथ रेट कम होने और व्यापार पर बढ़ती अनिश्चितता का असर निर्यात पर देखने को मिल सकता है। साथ ही कहा गया है कि जीएसटी और फार्म स्कीम ने विकास को धीमा किया है।
इकोनॉमिक सर्वे पेश करने से पहले कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने कहा, “हमारी टीम ने मेहनत और लगन से काम किया है। उम्मीद करता हूं कि परीणाम भी अच्छा आए और हम अर्थव्यवस्था में सहयोग कर सकें। उम्मीद करता हूं कि ईश्वर हम पर कृपा बनाए रखेंगे।”
यह इकोनॉमिक सर्वे ऐसे समय में पेश हुआ है जब इस साल जनवरी से मार्च की तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर पांच साल में सबसे कम 5.8 फीसद हो गई थी। साथ ही अर्थव्यवस्था इस समय विनिर्माण और कृषि क्षेत्र में चुनौतियों का सामना कर रही है।
क्या होता है आर्थिक सर्वे
बजट से ठीक पहले संसद में वित्त मंत्री द्वारा आर्थिक सर्वे के जरिए देश की आर्थिक दशा की तस्वीर पेश की जाती है। इसमें बताया जाता है कि पिछले 12 महीने के दौरान देश में विकास की क्या स्थिति रही है और योजनाओं को किस तरह अमली जामा पहनाया गया। इकॉनोमिक सर्वे में इसके बारे में विस्तार से बताया जाता है। आर्थिक सर्वे संसद के दोनों सदनों में पेश होता है। आर्थिक सर्वे से पिछले साल की आर्थिक प्रगति का लेखा जोखा तो मिलता ही है वहीं नए वित्त वर्ष में आर्थिक विकास का क्या रास्ता होगा, इसका अनुमान लग जाता है।