
ग्रह नक्षत्रों से जब सहयोग नहीं मिल पाता है तो उसकी स्थिति को ठीक करने के लिए लोग विभिन्न उपाय अपनाते हैं। ज्योतिष शास्त्र की सलाह लेकर लोग अलग अलग रत्नों के आभूषण भी धारण करते हैं। हर किसी के लिए हर तरह के रत्न और धातु लाभदायक हो ऐसा जरूरी नहीं है। व्यक्ति की कुंडली और उससे जुड़े ग्रह नक्षत्रों की स्थिति को देखकर ही ये तय किया जाता है। आपने कई लोगों को कछुए वाली अंगूठी पहने हुए देखा होगा। इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि कछुए वाली अंगूठी पहनने से जातक को क्या लाभ मिल सकते हैं और इसे पहनने का सही तरीका क्या है। कछुए वाली अंगूठी के फायदे वास्तुशास्त्र में कछुए वाली अंगूठी को बहुत ही शुभ माना गया है। ये उस शख्स के जीवन के दोषों को शांत करने में मदद करती है। इसकी वजह से व्यक्ति को अपने अंदर आत्मविश्वास बढ़ता हुआ महसूस होता है।
विदुर नीति की मदद से ना सिर्फ बचत बल्कि धन में करें इजाफा लक्ष्मी माता से है इसका संबंध आपको ज्ञात होगा कि समुद्र मंथन की कथा के अनुसार उसमें से कछुआ और लक्ष्मी माता उत्पन्न हुए थे। कछुआ जल में रहने वाला जीव है और ये सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इतना ही नहीं ये भगवान विष्णु के अवतार के रूप में भी जाना जाता है। यही वजह है कि वास्तु शास्त्र में कछुए को इतना अहम माना गया है। यह जीव धन में वृद्धि करने के लिए शुभ समझा गया है। साथ ही इसकी मौजूदगी से शांति, निरंतरता, धीरज और विकास होता है। सावधानी भी है जरूरी इस अंगूठी के ढेरों लाभ हैं, मगर इसके बावजूद इससे जुड़ी कुछ सावधानियां हैं जिसके बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है। इसकी मदद से आप इससे होने वाले नकारात्मक और बुरे प्रभावों से बचे रहेंगे। वास्तु शास्त्र के मुताबिक कछुए वाली अंगूठी आमतौर पर चांदी से ही बनी हुई होनी चाहिए। अगर आप इस अंगूठी के लिए कोई दूसरा धातु जैसा सोना या कोई दूसरा रत्न चाहते हैं तो ध्यान रखें की कछुए का आकार चांदी से ही बना हो और उसपर आप कोई रत्न वगैरह का काम करवा सकते हैं।
लव मैरेज के बावजूद रिश्ते में है तनाव तो अपनाएं ये वास्तु टिप्स पहनने का भी है नियम इस अंगूठी को पहनने वाला धारक इस बात का ध्यान रखे कि कछुए के सिर वाला हिस्सा पहनने वाले व्यक्ति की तरफ होना चाहिए। अगर कछुए का मुंह बाहर की तरफ होगा तो इसका प्रभाव भी विपरीत हो जाएगा। इससे धन आने के बजाय हाथ से चला जाएगा। इस अंगूठी को सीधे हाथ की मध्यमा या तर्जनी उंगली में धारण करें। कछुए को माता लक्ष्मी से जोड़ा गया है इसलिए आप इसे पहनने के लिए शुक्रवार का दिन ही चुनें। शुक्रवार को ही इस अंगूठी की खरीदारी करें और घर लाने के पश्चात् लक्ष्मी जी की तस्वीर के सामने इसे रख दें। कुछ देर रखने के बाद इसे दूध और पानी के मिश्रण से शुद्ध करें और अगरबत्ती जलाएं। इस दौरान आप माता लक्ष्मी के बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं। ना करें ये भूल आप इस अंगूठी को धारण करने के बाद इसे ज्यादा घुमाए नहीं। ऐसा करने से कछुए की मुख की दिशा में भी परिवर्तन होगा और इससे धन के आगमन में परेशानी होगी।