
सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को असम के हिरासत केंद्रों में वर्षों से बंद अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की जमानत वाली सुनवाई से दूर रखने की मांग की है।

बता दें कि हाल के महीने में एनआरसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व असम की राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया था। कोर्ट ने कहा था कि अवैध नागरिकों पर सरकार क्या कर रही है। साथ ही असम के मुख्य सचिव से भी पूछा गया था कि ऐसे नागरिकों की मौजूदा स्थिति क्या है, यही नहीं कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था कि कितने लोगों को हिरासत में लिया गया है। इस संबंध में जल्द से जल्द जवाब दाखिल करें।
जिसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि किसी भी हालात से निपटने के लिए सुरक्षा बल राज्य में तैनात हैं, और ये तबतक रहेगा जबतक कि चुनाव संपन्न न हो जाए।
सुप्रीम कोर्ट असम में अवैध घुसपैठियों को वर्षो से हिरासत केंद्रों में रखने पर गंभीर चिंता जता चुका है। 28 जनवरी को कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा था कि असम में कितने हिरासत केंद्र चल रहे हैं। पिछले दस वर्षो के दौरान कितने विदेशियों को हिरासत में लिया गया।