
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए चौथे चरण का मतदान पूरा हो चुका है. पांचवे चरण में अब 7 राज्यों की 51 संसदीय सीटों के लिए 6 मई को मतदान होगा. इस बीच चर्चा 1980 के उस लोकसभा चुनाव की, जिसमें देश आपातकाल को भुला इंदिरा के पीछे दोबारा आ खड़ा हुआ था.

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए चौथे चरण का मतदान पूरा हो चुका है. अब न केवल सत्ता बल्कि विपक्ष पांचवे चरण की वोटिंग को अपने पक्ष में करने के लिए नए सिरे से रणनीति तैयार कर रहे हैं. मौजूदा लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के लिए 6 मई को मतदान होना है.
इस मतदान से पहले हम आपको 1980 के लोकसभा चुनाव में ले चलते हैं. 1980 के इस लोकसभा चुनाव में न केवल कांग्रेस की सत्ता में एक बार फिर वापसी हुई थी, बल्कि भारतीय राजनीति को एक नया मोड़ मिला था. चुनावनामा में आज हम आपको बताते हैं कि जनता पार्टी सरकार की किस एक गलती की वजह से पूरा देश आपातकाल को भुलाकर एक बार इंदिरा के पीछे आ खड़ा हुआ था.
जीप खरीद मामले में इंदिरा पर लगा था भ्रष्टाचार का आरोप
1977 में जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज की थी. वहीं कांग्रेस का अस्तित्व सिर्फ दक्षिण भारत तक ही सिमट का रह गया था. इस चुनाव के बाद मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री और चौधरी चरण सिंह को गृहमंत्री की जिम्मेदारी मिली. जनता पार्टी की सरकार के गठन के साथ इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी को लेकर प्रयाास शुरू हो गए.
गिरफ्तारी के लिए इंदिरा पर जीप घोटाले का आरोप लगाया गया. इस आरोप के तहत, तत्कालीन जनता सरकार का दावा था कि इंदिरा ने अपने चुनाव प्रचार के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग करके 100 जीपों की खरीद की थी. इन्हीं आरोपों के तहत 3 अक्टूबर 1977 को जनता पार्टी की सरकार ने इंदिरा गांधी को गिफ्तार कर लिया.
गिरफ्तारी को लेकर बार-बार बदली ‘जनता’ सरकार की रणनीति
इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी को लेकर जनता पार्टी सरकार हर रोज नई रणनीति तैयार कर रही थी. सबसे पहली रणनीति गिरफ्तारी की तारीख को लेकर था. जनता पार्टी सरकार ने पहले इंदिरा की गिरफ्तारी के लिए 1 अक्टूबर तय किया था, लेकिन शनिवार होने के चलते उनकी गिरफ्तारी को टाल दिया गया.
इसके बाद 2 अक्टूबर पर विचार किया गया, लेकिन सहमति नहीं बनी. आखिर में इंदिरा की गिरफ्तारी के लिए 3 अक्टूबर तय हुई. अब, समस्या यह थी कि गिरफ्तारी के बाद इंदिरा गांधी को कहां रखा जाएगा. लंबी जद्दोजहद के बाद, इंदिरा गांधी को बड़कट लेक गेस्ट हाउस में रखने पर सहमति बनी. लेकिन, किन्हीं कारणों से आखिरी समय पर इस फैसले को बदल दिया गया. गिरफ्तारी के बाद इंदिरा गांधी को दिल्ली के किंग्सवे कैंप स्थिति पुलिस लाइन लाया गया.
सबूत न होने के चलते 24 घंटे में इंदिरा हुईं आरोपों से बरी
गिरफ्तारी के बाद इंदिरा गांधी को 3 अक्टूबर की रात्रि किंग्सवे कैंप की पुलिस लाइन स्थित गैजेटेड ऑफिसर्स मेस में लाया गया. 4 अक्टूबर की सुबह इंदिरा गांधी को न्यायालय में पेश किया गया. न्यायालय में जिरह के दौरान सरकार इंदिरा गांधी के खिलाफ कोई भी सबूत पेश करने में विफल रही. जिसके चलते, न्यायालय ने सबूतों के आभाव में केस को रद्द कर इंदिरा गांधी को बरी कर दिया.
इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम जनता पार्टी सरकार के लिए बेहद नुकसानदायक सिद्ध हुआ. इस गिरफ्तारी के नतीजे यह निलके कि जो जनता आपातकाल के चलते इंदिरा गांधी से नाराज थी, अब वहीं जनता सहानभूति के साथ इंदिरा गांधी के साथ खड़ी थी. जनता की इस सहानभूति का असर 1980 के लोकसभा चुनाव में भी दिखा. इस चुनाव में इंदिरा गांधी ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की.