
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई द्वारा संचालित किए जा रहे सात एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) और 10 एसपीएस (सीवेज पंपिंग स्टेशन) का संचालन अब 15 साल तक अडाणी इंटरप्राइजेज को करना है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने अडाणी इंटरप्राइजेज को पत्र लिखकर 31 मार्च तक इन्हें अपने अधिकार में लेने के लिए कहा था, लेकिन इन्कार कर दिया है। समझौते के अनुसार 11 मई तक सातों एसटीपी और एसपीएस उनके पास चले जाएंगे।
पीएम ने तीन एसटीपी का शिलान्यास किया था
16 दिसंबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संगम नगरी में कुंभ के कार्यों का लोकार्पण करने आए थे तो उन्होंने नैनी, झूंसी और फाफामऊ में बनने वाले तीन एसटीपी का शिलान्यास भी किया था। उसके साथ ही नैनी, नुमायाडाही, राजापुर, कोडरा, पौनघाट और सलोरी के सात एसटीपी और 10 एसपीएस का 15 साल तक का संचालन का अधिकार भी अडाणी इंटरप्राइजेज को मिल गया था। कुंभ मेला समाप्त होने के बाद गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने अडाणी इंटरप्राइजेज को 31 मार्च तक एसटीपी और एसपीएस को अपने अधिकार में लेने के लिए पत्र लिखा।
सलोरी एसीटीपी में 14 एमएलडी की यूनिट पहले से ही निजी हाथों में
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक पीके अग्रवाल का कहना है कि अडाणी इंटरप्राइजेज ने 31 मार्च तक एसटीपी और एसपीएस को अपने अधिकार में लेने से इन्कार किया है। समझौते के अनुसार 11 मई तक उन्हें इसे लेना होगा। सलोरी एसीटीपी में 14 एमएलडी (मीलियन लीटर प्रति लीटर) की यूनिट पहले से ही निजी हाथों में जा चुकी है।
एसटीपी को निजी हाथों में देने का विरोध
संघर्ष मोर्चा समिति के पदाधिकारियों ने सात एसटीपी और 10 एसपीएस को निजी हाथों में देने के सरकार के फैसले की आलोचना की है। चेतावनी दी है कि अगर सरकार अपना निर्णय वापस नहीं लेती है तो मोर्चा आंदोलन करेगा। इसको लेकर मंगलवार को बैठक भी हुई। उसमें पूर्व पार्षद शिवसेवक सिंह, अशोक सिंह, कमलेश सिंह, अमित सिंह, आनंद घिल्डियाल, अमरजीत यादव, रंजन कुमार, सुशील कुमार आदि मौजूद रहे।