मायावती को अपनी बीवी के कपड़े पहंवाये थे, और सुप्रीमों को सिक्कों से…

बहुजन समाज पार्टी के नेता शमीम अहमद सिद्दीकी जो लगभग 40 वर्षों से काशीराम के ज़माने से पार्टी के लिए काम करते चले आ रहे हैं, फिर उसके बाद बहन जी के साथ काफ़ी कार्य किए, सिद्दीकी बताते हैं कि उन्होंने काशीराम जी के साथ दिल्ली में काफ़ी ज़मीनी स्तर पर संघर्ष किया था और उनके बाद बहन जी के साथ जुड़े रहे, वह बताते हैं कि उन्होंने लगभग 30 वर्ष पहले अलीगढ़ के शाह जमाल में बहन जी को बुलाकर ऐतिहासिक कार्यक्रम किया था

जिसमें मुस्लिम समाज के लोगों को एक प्लेटफ़ार्म पर इकट्ठा किया था, फिर स्वयं बहन जी ने अपनी किताब मेरे “संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेंट” का सफ़रनामा के प्रथम भाग में पेज नंबर 146-47 में स्वयं मेरे बारे में लिखा, मैंने बहन जी के खातिर अपनी चक्की तक बेची थी और उन्हें चुनाव लड़ाया था, मैंने बहन जी के चुनाव के खातिर अपने बीमार बच्चों को छोड़कर अपने घर से पार्टी के कार्य के लिए निकल जाता था और परिवार को ना देख कर अपनी पूरी जिंदगी पार्टी हित में लगा कर कार्य किया, मायावती के पुराने कपड़े हो गए थे अपनी बीवी के कपड़े मायावती को पहनवाये, आज समय ऐसा आ गया है कि पार्टी पुराने लोगों को नहीं पूछ रही है, नाही वरिष्ठ लोगों को पार्टी की कोई ज़िम्मेदारी दे रही है, और गठबंधन बनाकर जिसमें कांग्रेस शामिल नहीं है वह सिर्फ वोटों को काटने का ही काम करेंगे और गठबंधन का प्रत्याशी अलीगढ़ का होता तो ज्यादा अच्छा होता बहन जी को किसी भी व्यक्ति को अपना पुराना वक्त हमेशा याद रहता है पर मेरे समझ में यह नहीं आता कि वह कैसे पुराने लोगों को भूल गई और पार्टी के नेता जो संगठन चला रहे हैं वे सिर्फ पार्टी हित न देखकर अपने हित में काम कर रहे हैं।