दुनियाभर के 35 आर्च में से 20 तरह के आर्च अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की इमारतों में  

आर्किटेक्चर यानि वास्तुकला  का इतिहास बहुत पुराना है,आज भी हमारे सामने वास्तु कला के ऐसे उदाहरण है जिन्हें बनाना शायद नामुमकिन है,मिस्र के पिरामिड व सिन्धु घाटी के स्थापत्य कला को किसने व कैसे बनाया , इसका आज तक पता नहीं चल सका। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के आर्किटेक्चर डिपार्टमेंट के शिक्षक फरहान फाजली ने ऐसी की किताब लिखी है , जिसमें दुनिया भर के 35 आर्च की बनावट की वर्णन किया है,उनकी किताब ‘एन एंथोलाजी आफ आर्चेस इन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय’ में भवन स्थापत्य कला के नमूने बताएं गए हैं. सर बनिस्टर फ्लेचर ने दुनिया भर के 35 आर्च का अध्ययन किया और उसे संग्रहित  किया, अपनी किताब ‘ए हिस्ट्री आफ आर्किटेक्चर’ में दुनिया भर में 35 आर्च को इमारतो में पाया.  फरहान फाजली ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक इमारतों में ही 20 तरह के आर्च पर शोध किया और इसको किताब की शक्ल दे दी। आर्किटेक्चर को  कला और विज्ञान दोनों ही मानते है. और सर सैय्यद अहमद खां ने जब एएमयू की नींव रखी तो सबसे पहले आर्किटेक्चर को सब्जेक्ट के रुप में पढ़ाया गया। उन्होंने यूरोपिय बिल्डिंग डिजाइन व भारतीय वास्तुकला को अच्छी तरह समझ कर एएमयू की इमारतों में प्रयोग किया । वे एएमयू को आक्सफोर्ड बनाना चाहते थे , इसलिए भवन निर्माण को भी आक्सफोर्ड का लुक देना चाहते थे।    

फरहान फाजली ने बताया कि इस्लामिक आर्किटेक्चर का हिंदुस्तान में बहुत बड़ा रोल रहा है, क्योंकि मुगल सल्तनत में बहुत सी तरह की इमारतो में आर्च को बनाया गया । इस्लामिक बिल्डिगों में आर्च का प्रयोग किया गया। पूरे विश्व के आर्च को जब देखा जाता है तो बहुत से आर्च आते हैं।   दुनिया भर में बैरिस्टर फ्लेचर ने दुनिया भर में 35 आर्च का वर्णन किया है। जिनमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ही 20 तरह के आर्च की डिजाइन पाई गई है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में बने इन आर्च को एक किताब में वर्णित किया है . आर्किटेक्चर फरहान फाजली ने  बताया कि हर एक पुरानी इमारत जो एएमयू की है, उसमें कम से कम चार पांच तरह के आर्च देखने को मिलते हैं । लेकिन जब पूरी विश्वविद्यालय की इमारत को कंपाइल करते हैं. तो कम से कम 20 तरह के आर्च देखने को मिलते हैं। इन आर्च को प्रेजेंटेशन के जरिए दिखाया गया ,जो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बिल्डिंग इतिहास को प्रदर्शित करते हैं। 

फाजली ने बताया कि विश्वविद्यालय की इमारतों को बनवाने का काम सर सैयद अहमद खान ने शुरू किया था.  जब सर सैयद अहमद खान ने इमारतों को तामीर की जा रही थी।  उन्होंने यूरोपियन कल्चर को भी समाहित किया  और इंडियन कल्चर को भी समाहित किया।फिर एएमयू की इमारतों में इसको डिजाइन किया। सर सैय्यद ने फ्रेंच इमारतों का भी अध्ययन किया था। उन्होंने बताया कि मैंने अपनी बुक में केवल आर्च का विश्लेषण किया है, डिस्कवर किया है, उसको समझा है और इसी आर्च का  अध्ययन इस किताब में किया गया है। 

उन्होंने बताया कि इस किताब में विभिन्न आर्चों का वर्णन है और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की हेरिटेज बिल्डिंगों का वर्णन है। इसके अलावा आर्च दुनिया में पहली बार कहां बनाए गए। रोमन ने कब ,कहां बनाया आर्च को कैसे बनाते हैं. उसकी कंस्ट्रक्शन तकनीकी भी इस किताब में है। जो कि आर्किटेक्चर के छात्रों को आर्च जानने समझने में आसानी होगी।