
भारत में बलात्कार के बढ़ते मामलों के साथ-साथ टू फिंगर टेस्ट पर चर्चा होती रहती है। तमाम लोगों ने इस परीक्षण के प्रति कई प्रकार की धारणाएं बना रखी हैं। इसे टीएफटी के नाम से भी जाना जाता है।बलात्कार को दुनिया के सबसे बड़े जुर्मों की श्रेणी में रखा गया है, अपनी हवस की आग बुझाने के लिए कुछ लोग इस हद तक गुजर जाते हैं कि महिला की मर्जी के बगैर शारीरिक संबंध बनाकर उनकी हंसती खेलती जिंदगी बर्बाद कर देते हैं। जब किसी महिला के साथ रेप होता है तो यह इतना दर्दनाक होता हैं कि उस महिला के अलावा शायद ही कोई उस दर्द का एहसास कर सके।
बलात्कार के बाद महिला का जो मेडिकल परीक्षण होता हैं उसे टू फिंगर टेस्ट कहते हैं। यह टेस्ट बलात्कार से भी ज्यादा दर्दनाक होता है। इस टेस्ट की प्रक्रिया को दूसरा बलात्कार भी कहा जाता है। इसमें डॉक्टर महिला के योनि में अंगूली डालकर यह पता करते हैं कि उसके साथ रेप हुआ हैं या नहीं। डॉक्टर का मानना है कि जबरदस्ती से किए गए संभोग में अंदर का हाइमन टूट जाता हैं जबकि सहमति के आधार पर ऐसा नहीं होता।
सैकड़ों साल पुराने इस टू फिंगर टेस्ट को लेकर सवाल उठते रहे हैं। खुद कोर्ट भी इस मामले में मदभेद रखता है। कभी कोई कोर्ट इसे लागू कर देता हैं तो कभी इसपर बैन लग जाता है। कई बार तो इस रिपोर्ट पर भी सवाल उठ जाते हैं क्योंकि सहमति से किए गए सेक्स में भी कई बार इसे टूट जाने का खतरा रहता हैं।