
लखनऊ: कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों. दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां आज यूपी पुलिस के कॉन्स्टेबल श्माम बाबू पर बिल्कुल फिट बैठती हैं. 14 साल यूपी पुलिस की नौकरी की, मेहनत की, फिर पीसीएस की तैयारी की. जब नतीजे आए तो पता चला एक कॉन्स्टेबल सीधे एसडीएम बन जाएंगा. पीसीएस-2016 में सफल अभ्यर्थियों की लिस्ट में श्याम बाबू ने 52वीं रैंक हासिल की है.
कॉन्सटेबल श्याम बाबू का ये सफर आसान नहीं था. इसके पीछे उनकी मेहनत, उनका दृढ़ संकल्प था, उनकी मजबूत इच्छा शक्ति थी. हौसला था कुछ कर गुज़रने का. सो उन्होंने मेहनत की और खूब की, फिर जो नतीजा आया वह सभी के सामने है.
श्याम बाबू ने एक पत्रिका को बताया कि वो दिन में दफ्तर का काम करते थे और फिर रात में पढ़ाई किया करते थे. चूंकि कई बार दफ्तर का काम ज्यादा होता था फिर घर पर आकर पढ़ाई करने में दिक्कत होती थी. जिसके लिए वो कम सोते थे लेकिन पढ़ाई ज़रूर करते थे. उन्होंने ये भी बताया कि इसके लिए उन्होंने किसी तरह की कोई कोचिंग नहीं ली. बस खुद से पढ़ाई की. वो हमेशा कुछ न कुछ बेहतर करने की सोचा करते थे,
ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने पीसीएस के लिए सोचना शुरू किया
श्याम बाबू 2005 में जब 19 साल के थे तभी उनका सिलेक्शन यूपी पुलिस में हो गया था, और फिलहाल वो प्रयागराज हेडक्वार्टर में पोस्टेड हैं. श्याम बाबू के परिवार में 5 बहनें हैं और 1 बड़े भाई हैं और पूरा परिवार इस उपलब्धि पर खुशी से फूले नहीं समा रहा है. श्याम बाबू ने ये भी बताया कि जब वो तैयारी कर रहे थे तब लगभग सभी दोस्तों से बातचीत बंद हो गई थी. पूरी तरह से वो पढ़ाई पर ही फोकस कर रहे थे. फिर रिज़ल्ट आने के बाद सभी दोस्तों ने उन्हें बधाई दी.
श्याम बाबू ने 2016 मार्च महीने में पीसीएस का प्री दिया था फिर सितंबर में मेन्स का एग्जाम हुआ. उस एग्ज़ाम का रिजल्ट 2018 के नवंबर महीने में आया. इसके बाद 10 दिसंबर को उनका इंटरव्यू हुआ था. फिर 22 फरवरी को रिज़ल्ट आया जो टोकरी भर के खुशियां लाया. इनकी कहानी उन हजारों हजार लोगों के लिए प्रेरणा है जो साल दर साल इग्जाम की तैयारी करते हैं.