सपा बसपा गठबंधन से न नेता जी खुश है न चाचा जी।

लोकसभा चुनावों में महागठबंधन में अहम भूमिका निभाने का मंसूबा पाले सपा नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बड़ा झटका लग सकता है. यह झटका कोई और नहीं बल्कि उनके ‘अपने’ ही देने की तैयारी में है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश में बसपा और सपा गठबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। मुलायम ने गुरुवार बसपा के साथ हुए सपा के गठबंधन को गलत ठहराया और कहा कि उन्हें नहीं पता कि अखिलेश यादव ने किस आधार पर राज्य की आधा सीटें बसपा को दे दीं। मुलायम ने कहा कि सपा अध्यक्ष सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा करने में देरी कर रहे हैं। सपा के पूर्व मुखिया ने कहा कि वह अखिलेश से ज्यादा अनुभवी हैं। उन्होंने कहा कि सपा का संरक्षक तो उन्हें बनाया गया है लेकिन कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
मुलायम सिंह यादव ने कहा अखिलेश ने मुझसे पूछे बिना ही बसपा से गठबंधन कर लिया. आधी सीटें देने का आधार क्या है? अब हमारे पास केवल आधी सीटें रह गई हैं. हमारी पार्टी कहीं अधिक दमदार है. मुलायम ने कहा कि हम सशक्त हैं, लेकिन हमारे लोग पार्टी को कमजोर कर रहे हैं. हमने कितनी सशक्त पार्टी बनाई थी और ‘मैं मुख्यमंत्री बना और रक्षा मंत्री भी बना.’

वही दूसरी ओर मुलायम सिंह यादव के अनुज एवं प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रमुख शिवपाल यादव ने शनिवार को ऐलान कर दिया कि वह भतीजे अक्षय के खिलाफ फिरोजाबाद सीट से आगामी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. बता दें कि अक्षय अभी फिरोजाबाद सीट से ही सांसद हैं.फिरोजाबाद सीट से अक्षय यादव सांसद हैं. वह राम गोपाल यादव के बेटे हैं. वर्ष 2014 में फिरोजाबाद संसदीय सीट से चुनाव जीतने के दौरान अक्षय यादव की उम्र 27 साल रही. इस प्रकार वह यूपी के सबसे कम उम्र के सांसद रहे. शिवपाल सिंह यादव के अब फिरोजाबाद सीट से ही चुनाव लड़ने के ऐलान से लाजिमी है कि रामगोपाल यादव और उनके बेटे अक्षय मुश्किल में पड़ेंगे. वहीं अगर 2019 के लोकसभा चुनाव में इसी सीट से फिर अक्षय उतरेंगे तो चाचा शिवपाल से लड़ाई दिलचस्प होगी.

शिवपाल यादव ने मायावती के साथ गठबंधन करने को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर भी हमला बोला. भतीजे अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि न तो उन्होंने और न ही कभी मुलायम सिंह यादव ने मायावती को बहन जी बनाया तो आखिर अखिलेश यादव की बुआ वह कैसे बन गईं?.

शिवपाल ने सपा-बसपा गठबंधन पर कहा कि बसपा ने सपा को झटका देकर तीन बार भाजपा के सहयोग से सरकार बनाई. उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह को ‘‘गुण्डा”, सपा को गुंडों की पार्टीं तथा उन्हें दुराचारी बताने वाले दल के साथ गठबंधन पिता और चाचा का साफ अपमान है.
सपा बसपा गठबंधन का विरोध करने वाले शिवपाल सिंह यादव मायावती सरकार के कार्यकाल में 5 मार्च 2012 तक प्रतिपक्ष के नेता भी रहे। और वो अभी तक सपा कोटे से विधायक भी है उन्होंने सपा सपा कोटे से न अपनी विधायकी छोड़ी और न अखिलेश यादव ने उनको निष्काषित किया

कारण चाहे जो भी रहे हो पर इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता है कि शिवपाल यादव प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बना कर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते है वही मुलायम सिंह के बयान भी समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के लिए परेशानी का सबब बन सकते है।

मुलायम सिंह यादव ने कहा कि भाजपा इस बार बेहतर स्थिति में है और अखिलेश को टिकट बंटवारे में यदि दिक्कत हो रही है तो वह उनकी मदद करने को तैयार हैं। सपा के संस्थापक ने कहा है कि जो लोग पार्टी से टिकट चाहते हैं वे उनसे संपर्क कर सकते हैं। मुलायम ने कहा कि पार्टी के लोग यदि उन तक कोई बात पहुंचाना चाहते हैं तो वे अपना नाम लिए बगैर उन्हें पत्र लिख सकते हैं।

मुलायम सिंह यादव अभी आजमगढ़ से लोकसभा सांसद हैं। उनका यह बयान लोकसभा चुनावों को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण है। बजट सत्र के अंतिम दिन मुलायम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी दोबारा पीएम बनकर वापस लौटें। मुलायम के इस बयान ने विपक्ष में खलबली मचा दी थी।

बता दे कभी हार ना मानने वाले मुलायम को अपने पारिवारिक कलह के चलते हार माननी पढ़ी। जनवरी 2017 में मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश यादव ने एक नाटकीय अंदाज में अपने गुट के नेताओं की बैठक में अपने पिता मुलायम को सपा प्रमुख से अपदस्त कर खुद को सपा प्रमुख घोषित कर दिया था।

नेता जी और चाचा जी की नारजगी से सपा और अखिलेश यादव के भविष्य पर क्या असर होगा इसके लिए मई तक इंतिज़ार करे।