
पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जैमल सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार को उनके पैतृक गांव पहुंचा। शहीद जवान जैमल सिंह पंजाब के मोगा के कोटइसे खां कस्बे के रहने वाले थे। सीआरपीएफ के आला अधिकारियों की मौजूदगी में शहीद जैमल सिंह का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल भी मौजूद रहीं। उन्होंने नम आंखों से शहीद को श्रद्धांजलि दी। मोगा के कई जिला स्तरीय नेता भी मौजूद रहें।
शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद लोगों ने शहीद जैमल सिंह अमर रहे के नारे लगाए। हर आंख नम थी। चारों तरफ गम और गुस्सा था।
बता दें कि, पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में मोगा जिले के गांव गलोटी निवासी जैमल सिंह शहीद हो गए थे। शादी के करीब 16 साल के बाद उनके घर एक बेटे ने जन्म लिया, जो अब पांच साल का है। शहीद के पांच वर्षीय बेटा गुरप्रकाश ने कहा, पापा से सुबह ही फोन पर बात हुई थी, वो कह रहे थे कि यहां ट्रैफिक बहुत है, शाम को बात करेंगे।
शहीद की पत्नी सुखजीत कौर ने बताया कि सुबह के समय उनका फोन आया था और कह रहे थे कि उन्हें परिवार की बहुत याद आ रही है। जैमल ने बताया कि वे श्रीनगर जा रहे हैं। यहां ट्रैफिक बहुत है, शाम को पहुंचकर बात करेंगे। लेकिन शाम को टीवी चैनलों पर खबर चलने लगी कि सीआरपीएफ पर आतंकवादियो ने हमला कर दिया है, जिसके बाद से परिवार की सांसे अटक सी गई और रात होते होते शहादत की खबर मिली।
सुखजीत कौर ने बताया कि उन्हें रात करीब साढ़े दस बजे पुष्टि हुई कि आतंकी हमले के दौरान शहीद होने वाले करीब 40 जवानों में जैमल सिंह भी शामिल हैं। जिसके बाद परिवार समेत गांव गलोटी में मातम छा गया। जैमल ड्राइवर थे और जब यूनिट एक से दूसरी जगह शिफ्ट की जा रही थी, तब सीआरपीएफ की बस को वही चला रहे थे। जैसे ही काफिला पुलवामा पहुंचा, एक एसयूवी गाड़ी बस से आकर भिड़ गई। टक्कर लगते ही धमाका हो गया और बस के परखच्चे उड़ गए।