बजट 2019 के पेश होने के बाद माना जा रहा है कि इससे मध्य वर्ग को होने वाला है खूब फायदा

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अनुपस्थिति में वित्त मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे पीयूष गोयल शुक्रवार को संसद में ‘बंपर बजट’ पेश किया।

पीयूष गोयल जब सदन में बजट पेश कर रहे थे तो सदन में लगातार वाह-वाह और मोदी-मोदी के नारे गूंज रहे थे. मोदी सरकार ने अपने बजट में सभी वर्गों को खुश करने का भरसक प्रयास किया।इस अवसर पर अपने बजट भाषण में कहा कि उनकी सरकार दहाई अंक वाली मुद्रास्फीति पर लगाम कसने में सफल रही है। गोयल ने कहा कि उन्होंने कमरतोड़ महंगाई की कमर तोड़ी है। हमारे कार्यकाल में औसत मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत रही है, जो किसी भी अन्य सरकार के पूरे कार्यकाल के मुद्रास्फीति आंकड़े से कम है। दिसंबर 2018 में मुद्रास्फीति 2.19 प्रतिशत रही। अंतरिम बजट पेश करते हुए गोयल ने कहा कि यूपीए सरकार के 2009-2014 के शासन में मुद्रास्फीति औसतन 10.1 प्रतिशत पर रही थी। उन्होंने कहा कि तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी यह स्वीकार किया था, ‘हम भी लगातार बनी रहने वाली मुद्रास्फीति को उतना नियंत्रित नहीं कर सके, जितना हम चाहते थे। इसका प्राथमिक कारण खाद्य मुद्रास्फीति का बढ़ना था।’

आम चुनाव से पहले आमतौर पर सरकार अंतरिम बजट पेश करती है जिसमें नई सरकार बनने तक के लिये चार माह का लेखानुदान पारित कराया जाता है. पहले से रेल, कोयला मंत्रालय देख रहे पीयूष गोयल को पिछले सप्ताह ही अरुण जेटली के स्थान पर वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया. जेटली पिछले महीने अपना इलाज कराने अचानक अमेरिका चले गये. चुनाव के बाद सत्ता में आने वाली नई सरकार जुलाई में पूर्ण बजट पेश करेगी.

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अपने बजट भाषण की शुरुआत अपने पूर्ववर्ती अरुण जेटली के शीघ्र स्वस्थ होने और लंबी उम्र की कामना के साथ की। उन्होंने कहा, ‘आज मुझे श्री अरुण जेटली की कमी बहुत खल रही है। मैं जेटली के शीघ्र ठीक होने और राष्ट्र की सेवा के लिए उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीघार्यु जीवन की कामना के साथ सदन में शामिल हो रहा हूं।’ पीयूष गोयल ने ऐलान किया है कि 12 करोड़ किसानों को 6000 रुपये प्रति वर्ष दिया जाएगा. केंद्र सरकार अपना अंतरिम बजट दे रही है. बीते पांच साल के दौरान केन्द्र सरकार ने कृषि क्षेत्र और किसान के लिए दो बड़े काम किए थे. पहला काम यह था कि दो साल पहले बजट में सिंचाई के लिए बड़ा आवंटन किया था. इससे बड़ा फायदा किसानों को मिला. वहीं केन्द्र सरकार का दूसरा बड़ा फैसला एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) में इजाफे का था. जब पिछले साल बजट में एमएसपी को डेढ़ गुना बढ़ाने का काम किया था.

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जीडीपी के आंकड़ों पर संदेह जाहिर करते हुए शुक्रवार को इस बात पर आश्चर्य जताया कि जब बेरोजगारी की दर 45 साल में सर्वाधिक है तब अर्थव्यवस्था की वृद्धि सात फीसदी कैसे हो रही है?

केंद्र पर कटाक्ष करते हुए पूर्व वित्त मंत्री ने दावा किया कि जब सरकार ने जीडीपी के आंकड़ों की समीक्षा की तो उसे यह अहसास नहीं हुआ था कि बेरोजगारी के आंकड़ों की भी समीक्षा होती है।
अंतरिम बजट से पहले चिदंबरम ने यह टिप्पणियां कीं ।

सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा था कि उसने श्रम बल पर सर्वे को अंतिम रूप नहीं दिया है जो, खबरों के अनुसार यह बताता है कि देश में बेरोजगारी की दर 2017…18 में 6.1 रही जो 45 साल में सर्वाधिक है। बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार के अनुसार, नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) के, श्रम बल संबंधी सर्वे में बताया गया है कि 1972…73 में बेरोजगारी की दर आखिरी बार सबसे ज्यादा थी। इसमें यह भी कहा गया है कि 2011..12 में बेरोजगारी की दर 2.2 फीसदी थी।

चिदंबरम ने ट्विटर पर कहा ‘‘नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने पूछा ‘रोजगार के बिना, कोई देश औसत सात फीसदी की दर से कैसे वृद्धि कर सकता है ? ‘ यही सवाल हमारा भी है। जब 45 साल में बेरोजगारी सर्वाधिक है, तो हम इस बात पर कैसे भरोसा कर लें कि अर्थव्यवस्था सात फीसदी की दर से वृद्धि कर रही है।”

उन्होंने ट्वीट किया ‘‘मोदी सरकार ने जीडीपी की वृद्धि के आंकड़ों की समीक्षा की। सरकार को यह अहसास ही नहीं हुआ कि बेरोजगारी के आंकड़ों की भी समीक्षा की जाती है।”
मोदी सरकार द्वारा बजट में मध्यम वर्ग और किसानों के लिए बड़े आयकर उपहार के बारे में पूछे जाने पर मनमोहन सिंह ने कहा कि मुझे लगता है कि इन परिस्थितियों में किसानों और मध्यम वर्ग को रियायतें देना स्पष्ट रूप से चुनाव पर असर पड़ेगा.’

बजट में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिये 100 रुपये के उनके मासिक योगदान के साथ 60 साल की आयु पूरी होने के बाद उन्हें 3,000 रुपये मासिक पेंशन दी जायेगी. 18 वर्ष की आयु में इस योजना से जुड़ने वालों कामगारों को 55 रुपये प्रतिमाह का अंशदान देना होगा जबकि 29 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले असंगठित क्षेत्र के कामगार को 100 रुपये प्रतिमाह का अंशदान 60 वर्ष की आयु तक करना होगा. सरकार भी इस दौरान प्रत्येक माह बराबर की राशि पेंशन खाते में जमा करेगी. योजना के लिये पहले साल बजट में 500 करोड़ का प्रावधान किया गया है.

ग्रामीण भारत के लिए इस बजट में काफी कुछ रहा, ग्रामीण इलाकों में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए गोकुल मिशन की शुरुआत की गई. इसके अलावा छोटे व मध्यम वर्गीय उद्योगों को बढ़ाने के लिए सरकार की योजनाओं का फायदा ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को मिलेगा. बजट में किसानों को 6 हजार सालाना पेंशन देने की बात कही गई. इसका फायदा खेत मालिकों को तो मिलेगा लेकिन खेत में मजदूरी करके गुजारा करने वाले लोगों को इसका फायदा नहीं मिलेगा. 3 लाख करोड़ का आवंटन किया गया जिनमें अधिकतम बजट का इस्तेमाल नए रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए किए जाएंगे. उम्मीद जताई जा रही थी कि रक्षा के लिए ज्यादा फंड आवंटित होगा. इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ऐलान किया है, विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि इससे ऑटो इंडस्ट्री को रफ्तार मिलेगी. इस बजट से बॉन्ड होल्डर्स को नुकसान पहुंच सकता है.

सरकार का वित्तिय कोष घाटा 3.4 फीसदी होने का अनुमान जताया जा रहा है. रीयल एस्टेट क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए गोयल ने बिना बिके मकानों के अनुमानित किराए पर कर में छूट को एक साल से बढ़ाकर दो साल करने का प्रस्ताव किया है. यह छूट परियोजना पूर्ण होने के साल के अंतिम समय से शुरू होगी.संपत्ति सलाहकारों के अनुसार सात-आठ बड़े शहरों में छह से सात लाख आवास बिना बिके हुए पड़े हैं. अंतरिम बजट में अचल संपत्ति को बेचने पर होने वाले 2 करोड़ रूपये तक के पूंजीगत लाभ पर करदाता आयकर अधिनियम की धारा 54 के अंतर्गत कर से छूट देने का प्रस्ताव किया है यदि वह अपनी पूंजी का इस्तेमाल दो घरों की खरीद पर करता है. अभी तक यह छूट एक घर में निवेश पर ही उपलब्ध है. हालांकि इस लाभ को जीवन में एक बार ही प्राप्‍त किया जा सकता है.

लोक-लुभावन बजट का खामियाजा स्वास्थ्य के साथ शिक्षा को भी उठाना पड़ा। सामान्य वर्ग को आरक्षण, सातवें वेतनमान के अनुरूप भत्ते एवं बढ़ी हुई फेलोशिप के चलते खर्च में भारी-भरकम बढ़ोतरी होने के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय के बजट में मात्र 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। पिछले साल शिक्षा के लिए 85,010 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, वह इस साल 93.84 हजार करोड़ हो गया है। ऐसे में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के बजट की राह देख रहे शिक्षाविदों को जरूर निराशा होगी।

स्कूली शिक्षा बजट को इस साल 56,386.63 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले साल 50 हजार करोड़ रुपये था। स्कूली शिक्षा बजट का आधा से अधिक हिस्सा यानी 36,322 करोड़ रुपये समग्र शिक्षा अभियान के लिए रखा गया है। यह योजना पिछले साल सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, शिक्षक शिक्षण एवं वयस्क शिक्षा कार्यक्रम को मिलाकर बनाई गई थी। वहीं, स्कूल में बच्चों को नि:शुल्क भोजन मुहैया कराने वाली ‘मिड डे मील’ योजना के लिए बजट में 11 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। पिछले साल इस योजना के लिए 10,500 करोड़ दिए गए थे। केंद्रीय विद्यालय संगठन को इस साल 4862 करोड़ रुपये दिए गए हैं। पिछले साल बजट में इसके लिए 4425 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। हालांकि, संशोधित बजट में इसे बढ़ाकर 5006.75 करोड़ रुपये कर दिया गया था।