यमराज को खुश करने के लिए यहाँ कुत्तों के साथ किया जाता हैं ऐसा काम

इस पूरी दुनियां में कई तरह के धर्म हैं जिनका पालन लोग बड़ी सिद्दत के साथ करते हैं. इतने अधिक धर्म होने की वजह से कई तरह के रीती रिवाजों और मान्यताओं का भी जन्म हुआ हैं. ऐसे में लोग अपने पूर्वजों के द्वारा निभाई जाने वाली रस्मों को पूरी लगन के साथ करते हैं. हाल ही में भारत और अन्य देशों में हिन्दुओं का त्यौहार दिवाली बड़ी धूम धाम से मनाया गया. जैसा कि आप सभी जानते हैं इस त्यौहार में लोग घरों को सजाते हैं, रंगोली बनाते हैं, और माता लक्ष्मी की पूजा भी करते हैं. दिवाली का ये त्यौहार पुरे पांच दिनों तक चलता हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब हम भारतीय इन पांच दिनों तक दिवाली का त्यौहार मना रहे होते हैं उसी दौरान नेपाल में एक और त्यौहार चल रहा होता हैं जिसका नाम हैं ‘कुकुर तिहार’.

‘कुकुर तिहार’ नाम के इस त्यौहार को ‘कुत्तों की दिवाली’ नाम से भी जाना जाता हैं. इस त्यौहार को हर साल नेपाल के लोग बड़ी धूम धाम से मानते हैं. दिवाली की तरहये त्यौहार भी पुरे पांच दिनों तक चलता हैं. इस त्यौहार में कुत्तों की बड़ी खातिरदारी और पूजा की जाती हैं. यहाँ लोग कुत्तों को माला पहनाते हैं और उनके माथे पर टिका लगाकर उनकी पूजा भी करते हैं. इस त्यौहार की ख़ास बात ये हैं कि इन दोनों अपने पालतू कुत्तों के साथ साथ गली के कुत्तों की भी खातिरदारी होती हैं. इन गली में घुमने वाले कुत्तों को भी लोग तिलक लगते है, माला पहनाते हैं और स्वादिष्ट भोजन भी कराते हैं.

इस वजह से नेपाल में होती हैं कुत्तों की पूजा

अब आप में से कई लोग सोच रहे होंगे कि आखिर कुत्तों को पूजने वाला ये त्यौहार क्यों मनाया जाता हैं? हम आपकी जानकारी के लिए बता दे कि हर त्यौहार की तरह इसके पीछे भी एक वजह या फिर कहे मान्यता हैं. दरअसल नेपालियों का मानना हैं कि कुत्ता मृत्यु के देवता यमराज का दूत होता हैं. ऐसे में ये लोग कुत्ते की पूजा कर यमराज को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं. इसका मकसद ये होता हैं कि यमराज उन पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखे और सही वक़्त आने के पहले ही उन्हें अपने साथ ना ले जाए. आसान शब्दों में कहे तो ये लोग अकाल मृत्यु पर विजय प्राप्त करने के लिए ‘कुकुर तिहार’ मानते हैं.

कुत्तों के साथ अन्य जानवरों की भी होती हैं पूजा
इस त्यौहार का एक फायदा ये भी हैं कि इससे इंसान और कुत्तों के बीच एक अच्छा रिश्ता कायम होता हैं. ये दोनों एक दुसरे को ट्रस्ट करने लगते है और साथ में मिलजुल कर रहते हैं. इस त्यौहार में सिर्फ कुत्तों के साथ साथ अन्य जानवर जैसे गाय, बिल्ली और कौए की भी पूजा की जाती हैं. इस तरह हम कह सकते हैं कि ये त्यौहार जानवरों के लिए काफी फायदेमंद होता हैं. इससे उन्हें मान सम्मान के साथ स्वादिष्ट भोजन भी खाने को मिल जाता हैं