मर्दो के लिए बहुत ही ख़ास है सफेद मूसली, मर्दानगी से लेकर इन बीमारियों में होती है फायदेमंद

आयुर्वेद के अनुसार मूसली सर्दियों के लिए काफी अच्‍छी औषधि है। यह कई रोगों के लिए लाभदायक है। सालों से विभिन्न दवाइयो के निर्माण में भी सफेद मूसली का उपयोग किया जाता है। मूलतः यह एक ऐसी जडी-बूटी है जिससे किसी भी प्रकार की शारीरिक शिथिलता को दूर करने की क्षमता होती है। यही कारण है की कोई भी आयुर्वेदिक सत्व जैसे च्यवनप्राश आदि इसके बिना संम्पूर्ण नहीं माने जाते हैं।

# सफेद मूसली शीघ्रपतन के देसी इलाज के काफी मशहूर है। कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बनाकर एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम एक कप दूध के साथ लेने से शीघ्रपतन और वीर्य की कमी जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

# सफेद मुसली पुरुषों को शारीरिक तौर पर पुष्ट बनाने के अलावा वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में भी मदद करती है। यही नहीं, कई शोध अपने परिणाम बताते हैं कि डायबिटीस के बाद होने वाली नपुंसकता में भी सफेद मुसली सकारात्मक असर करती पाई गई है।

# अगर आपको अक्सर बदन दर्द की शि‍कायत बनी रहती है, तो प्रतिदिन सफेद मूसली की जड़ का सेवन फायदेमंद होता है। उच्च रक्तचाप, गठिया रोग में भी यह लाभकारी है।

# पेशाब में जलन की शिकायत होने पर तो सफेद मूसली की जड़ को पीसकर इलायची के साथ दूध में उबालकर पीना बेहद फायदेमंद होता है। दिन में दो बार इस दूध को पीना लाभदायक होगा।

# पथरी की समस्या में सफेद मूसली को इन्द्रायण की सूखी जड़ के साथ बराबर मात्रा (1-1 ग्राम) में पीसकर, इसे एक गिलास पानी में डालकर खूब मिलाएं और मरीज को प्रतिदिन सुबह पिलाएं। यह उपाय सात दिनों में ही अपना प्रभाव दिखाता है और पथरी गल जाती है।