Sakat Chauth 2019: संतान को हर कष्‍ट से दूर रखता है माघ संकष्टि चतुर्थी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, व्रत विधि एवं कथा…

सकट चौथ (Sakat Chauth 2019) का व्रत इसी सप्‍ताह है. इस व्रत को संतान की लंबी आयु की कामना से रखा जाता है. मान्‍यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से हर तरह के संकट दूर होते हैं, संतान को दीर्घायु प्राप्‍त होती है.

इस व्रत को संकष्टी चतुर्थी, वक्रकुंडी चतुर्थी, तिलकुटा चौथ, माघी चौथ के नाम से भी जाना जाता है. इस व्रत को हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाता है.

शुभ मुहूर्त
इस बार ये व्रत 24 जनवरी 2019 को है. 23 जनवरी रात 11.59 पर चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी और 24 जनवरी को रात 10.53 बजे तक रहेगी. शुभ मुहूर्त 24 जनवरी को रात 8.20 बजे से है.

व्रत कथा
सतयुग में महाराज हरिश्चंद्र के नगर में एक कुम्हार रहा करता था. एक बार उसने बर्तन बनाकर आंवा लगाया पर आंवा पका नहीं. बर्तन कच्चे रह गए. बार-बार नुकसान होते देख उसने एक तांत्रिक से पूछा तो उसने कहा कि बच्चे की बलि से ही तुम्हारा काम बनेगा.
तब उसने तपस्वी ऋषि शर्मा की मृत्यु से बेसहारा हुए उनके पुत्र को पकड़ कर सकट चौथ के दिन आंवा में डाल दिया. लेकिन बालक की माता ने उस दिन गणोश जी की पूजा की थी. बहुत तलाशने पर जब पुत्र नहीं मिला तो गणेश जी से प्रार्थना की.
सवेरे कुम्हार ने देखा कि आंवा पक गया, लेकिन बालक जीवित और सुरक्षित था. डरकर उसने राजा के सामने अपना पाप स्वीकार किया.
राजा ने बालक की माता से इस चमत्कार का रहस्य पूछा तो उसने गणोश पूजा के विषय में बताया. तब राजा ने सकट चौथ की महिमा स्वीकार की तथा पूरे नगर में गणेश पूजा करने का आदेश दिया. तबसे कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट हारिणी माना जाता है.

कैसे करें पूजा
– सुबह स्नान कर साफ और धुले हुए कपड़े पहनें. पूजा के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा को ईशानकोण में चौकी पर स्थापित करें. चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा पहले बिछा लें. भगवान के सामने हाथ जोड़कर पूजा और व्रत का संकल्प लें.
– इसके बाद पूरे दिन व्रत रखें.
– शाम के समय भगवान गणेश को जल, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप आदि अर्पित करें. अक्षत और फूल लेकर गणपति से अपनी मनोकामना कहें, उसके बाद ओम ‘गं गणपतये नम:’ मंत्र बोलते हुए गणेश जी को प्रणाम करें.
– एक थाली या केले का पत्ता लें, इस पर आपको एक रोली से त्रिकोण बनाना है. त्रिकोण के अग्र भाग पर एक घी का दीपक रखें. संतान की लंबी आयु की कामना करें.
– पूजन उपरांत चंद्रमा को शहद, चंदन, रोली मिश्रित दूध से अर्घ्य दें. पूजन के बाद लड्डू प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें.