मोदी सरकार में एक औऱ विश्विद्यालय प्रशासन ने सुलगायी देशद्रोह की चिंगारी

(जेएनयू की राह पर इन्ट्रीगल यूनिवर्सिटी प्रशासन, राष्ट्रगान पर लगायी पाबंदी, शासन/ प्रशासन ने नही ली कोई सुध)

लखनऊ।- देश मे अराजकता औऱ देशद्रोह का माहौल अब विश्वविद्यालय प्रशासन स्तर पर ज़ोर शोर से किया गया, जिसकी एक बानगी उत्तर प्रदेश, लखनऊ के एक विश्वविद्यालय में देखने को मिली!मोदी सरकार में एक औऱ विश्विद्यालय प्रशासन ने सुलगायी देशद्रोह की चिंगारीउत्तर प्रदेश में प्राप्त प्रथम अल्पसंख्यक दर्जा,(NKB) यूजीसी स्तर पर 12 बी स्टेटस, डीएसटी विज्ञान औऱ प्रोधौगिक मंत्रालय में अव्वल, Naac- UGC 2015, NIRF रैंकिंग- 2016, यूपी में फार्मेसी रैंकिंग में प्रथम, DSIR-SIRO मिनिस्टरी आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की मान्यता प्राप्त समेत इंटरनेशनल इंडो रशिया प्रोजेक्ट में लाखों की मद प्राप्त इट्रीरीगल यूनिवर्सिटी लखनऊ में 11 जनवरी को नेशनल एंथम एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाना था, जिसमें राष्ट्रगान को सामुहिक तौर पर सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को गाने के तैयारी चल थी, लेकिन जब राष्ट्रगान की बात प्रबन्धक कमेटी को मालूम चली तो अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षकों सहित विद्यार्थियों को अपनी-अपनी फैकल्टी में जाने का हुक़्म जारी करते हुए एक आदेश चेतावनी के तौर पर जारी किया गया कि जो भी सदस्य राष्ट्रगान में शामिल होगा उसके विरुद्ध गम्भीर एवं अनुशाश्नात्मक कार्यवाही की जायेगी, इसकी जानकारी यूनिवर्सिटी की एक मेल पर देखने को मिली है, जिससे यूनिवर्सिटी में तनाव का माहौल बना हुआ है!

इंटीग्रल विश्वविद्यालय लखनऊ के सम्मानित शिक्षकगण एवम कर्मचारी अपने अधिकार एवम हित् की संरक्षण के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19,1(C) के तहत इंटीग्रल इन्ट्रीगल विश्वविद्यालय कर्मचारी समिति के गठन की औपचारिक घोषणा की योजना रखी थी!
इस कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार 11 जनवरी 2019 को 2:00 बजे अकादमिक ब्लॉक-1 के सामने राष्ट्रगान के साथ शुरू होना था जिसकी नोटिस और आमंत्रण विश्व विद्यालय प्रशासन को दिया जा चुका था!

बहुत ही हर्षोल्लास एवम शांतिपूर्वक ढंग से बुद्धिजीवीगण सम्मिलित होने वाले थे,,जिसकी शुभारंभ पवित्र क़ुरआन की आयत और राष्ट्रगान के पश्चात विश्वविद्यायल के तराना के साथ होना तय हुआ था, साथ ही साथ प्रोग्राम में एक छोटा सा संबोधन भी था, जिसमे समिति के चीफ रिप्रेजेन्टेटिव ऑफ कमिटी ने गुडवत्ता वाली शिक्षा और शिक्षक को उनके कर्तव्य पूर्ति के लिए प्रोहत्साहन करना था, कमिटी ने अपने कर्मचारियों की शिकायत/समस्या की बात भी करनी थी और आश्वश्त किया जाना था कि समस्या के सार्वजनिक समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।उसके बाद समिति के सदस्यों ने तय किया था कि IUEC संबंधित प्रपत्रों को कुलपति महोदय को सौंप कर एम्प्लोयी कमिटी की सभा शांतिपूर्ण ढंग से मिष्ठान वितरण के साथ सम्पन्न होगा! जिसके जवाब में सारे शिक्षक गण ने रजिस्ट्रार यूनिवर्सिटी को मेल करके पूछा की राष्ट्रगान का आयोजन कबसे गलत हो गया.? जबकि इस कार्यक्रम की सूचना क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन को भी प्रेषित कर अवगत करा दिया गया था

वही राष्ट्रगान के आयोजन को अवैध करार देने वाला इंटीग्रल विश्वविद्यालय के तानाशाह प्रशासन पर आज तक कोई भी आधिकारिक तौर पर कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा नहीं पाया हैं!

राष्ट्रगान के अपमान पर हो सकती है 3 साल तक की सजा

राष्ट्रीय ध्वज व राष्ट्रगान के सम्मान और इसका अपमान करने की स्थिति में दी जाने वाली सजा पर संविधान में विस्तार से बताया गया है। किन बातों और हरकतों को झंडे और राष्ट्रगान का अपमान माना जाएगा, यह भी संविधान में बताया गया है। इस मुद्दे पर संविधान और इससे जुड़े कानूनी प्रावधान के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अपमान पर क्या कहता है संविधान.? मौलिक अधिकार संबंधी सेक्शन में संविधान कहता है कि हर भारतीय का कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करे और इसके द्वारा तय किए गए लक्ष्यों व संस्थाओं का सम्मान करे। इनमें राष्ट्रीय झंडा और राष्ट्रगान भी शामिल हैं। इसके अलावा, द कॉन्स्टिट्यूशन (ऐप्लिकेशन टू जम्मू ऐंड कश्मीर) ऑर्डर 1954 में भी कहा गया है कि राष्ट्रीय झंडा, प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नैशनल ऑनर ऐक्ट 1971 के तहत राष्ट्रीय झंडे और संविधान का अपमान करना दंडनीय अपराध है। ऐसा करने वाले को 3 साल तक की जेल या फिर जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है। इसी तरह, राष्ट्रगान को जानबूझकर रोकने या फिर राष्ट्रगान गाने के लिए जमा हुए समूह के लिए बाधा खड़ी करने पर अधिकतम 3 साल की सजा दी जा सकती है। इस सजा के साथ जुर्माना भरने का भी आदेश दिया जा सकता है अगर किसी ने राष्ट्रीय झंडे या फिर राष्ट्रगान का अपमान किया, तो उसके विरुद्ध सजा का प्रावधान है.?

इंटट्रिगल विश्विद्यालय में होने वाले राष्ट्र गान आयोजन का विवाद हल होने के बजाय बिगड़ता जा रहा है, विश्वविद्यालय प्रशासन के कुछ लोग जान बूझ कर इसे पेचीदा बनाने पर तुले हुवे हैं, अब ये मुद्दा चारदीवारी से बाहर जल्द ही किसी बड़े विवाद का शक्ल ले सकता हैं वही रजिस्ट्रार द्वारा एक अडवाइजरी जारी की गई कि तथाकतीथ IUEC के उद्घटान हेतु किये जाने वाले आयोजन में अगर कोई भी कर्मचारी उपस्तिथ हुआ तो यूनिवर्सिटी उस पर गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुवे कठोर कार्यवाही करेगी।

इसके बाद IUECऔर बहुत सारे शिक्षकों की तरफ से रजिस्ट्रार को मेल किया गया औऱ अवगत कराया गया कि फैकल्टी केवल राष्ट्र गान के आयोजन हेतु इकट्ठा हो रहे है,जिसकी अनुमति एवं सूचना लोकल पुलिस स्टेशन से ली जा चुकी है, क्या राष्ट्रगान का आयोजन गलत है.? जिसका रजिस्ट्रार और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया।फिर भी शिक्षको ने विश्वविद्यालय के तानाशाही रवैये पे राष्ट्र भावना और राष्ट्रगान को सम्मान देते हुवे राष्ट्रगान का आयोजन करते हुए झंडारोहण किया।

जबकि शिक्षकों का कहना है कि वाईस चांसलर औए डायरेक्टर प्लानिंग ने जानबूझकर सविधान का खुला उलंघन करते हुए राष्ट्रगान का सम्मान नहीं किया है,10 मीटर दूर राष्ट्रगान हो रहा था लेकिन तानाशाह प्रशासन इसमें शामिल नहीं हुआ।

जबकि उत्तर प्रदेश की यह यूनिवर्सिटी देश की दूसरी प्राइवेट यूनिवर्सिटी है जिसे UGC की तरफ से 12 B का स्टेटस हासिल है, NIRF ने इसके फार्मेसी विभाग, आर्किटेक्चर विभाग, मैनेजमेंट विभाग को बहुत सम्मानित रैंक दिया और UP का पहला फार्मेसी का खिताब दिया, यूनिवर्सिटी को NAACएवम,NBA जैसी संस्थाओं से उच्च रैंक हासिल हुआ,DST फिस्ट में शामिल होना बताता है कि यहां के शिक्षक निकम्मे तो कदापि नहीं हैं,इनकी मेहनत और लगन का नतीजा है कि बहुत सारे सरकारी विश्वविद्यालयों के बराबरी पर खड़ा है।

कंप्यूटर विभाग की तरह हर डिपार्टमेंट ने 2016 से 2018 तक महत्वपूर्ण विषयों पर दो दो अन्तराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित किये हैं, बायोसाइंस और बायोटेक विभाग द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर बड़ा आयोजन संपन्न कराया गया,भारत सरकार के इंस्पायर प्रोग्राम का आयोजन का सम्मान भी मिला।बहुत से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट यहां के शिक्षकों द्वारा किए जा रहे हैं।

इतने होनहार शिक्षकों पर निकम्मा होने का और काम न करने का आरोप प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से लगाता रहता है, तानाशाह यूनिवर्सिटी प्रशासन का रवैया दिनप्रतिदिन इतना खराब होता जा रहा है कि ऐसे होनहार शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के बजाय बदनाम किया जा रहा है।नाम न बताने की शर्त पे एक शिक्षक ने बताया कि तानाशाह प्रशासन में बैठे कुछ लोग इस विश्वविद्यालय को अपनी पुश्तैनी जागीर समझ बैठे है, रेगुलेटिंग अथॉरिटी और सरकार की आंखों में धूल झोंक कर इसके संसाधनों का निजी हित में भयानक दुरुपयोग किया जा रहा हैं, टाइम पर शक्षको को इन्क्रीमेंट नहीं दिया जाना, कई वर्षों से वेतन में कोई वृद्धि नही की गयी हैं, कम वेतन देना ,मनमाने ढंग से कुछ शिक्षकों को उनके पद से हटा कर डिमोट करके लैब सहायक बना देना, हर सेमेस्टर में 60 हजार से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं को बिना भुगतान के जाँच करवाना, पेपर सेटिंग तक भुगतान रहित कराना ये दर्शाता है कि शिक्षक हमेशा से अपना कर्तव्य का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करते रहे हैं जबकि एक परिवार जो यूनिवर्सिटी को अपनी निजी संपत्ति समझता रहा है उनका रवैया तानाशाही भरा और विश्वविद्यालय को अंग्रेज़ी औपनिवेश का नमूना बना कर रखा हुआ है

अब देखना होगा कि क्या राष्ट्रगान कार्यक्रम पर पाबंदी लगाने वाले इन्ट्रीगल विश्वविद्यालय प्रशासन के विरुद्ध शासन / प्रशासन और एचआरडी विभाग कोई ठोस कार्रवाई करेगा यह सविधान के नियमों की अवहेलना करने वालो पर केवल काग़ज़ी खानापूर्ति कर इतिश्री होगी।