सेक्स से जुड़ी ये बातें हैं सरासर झूठी, जानें इनकी हकीकत

क्या आपको लगता है कि आप सेक्स के बारे में सबकुछ जानते हैं तो एक बार फिर सोचें। इंटरनेट की दुनिया में सेक्स से जुड़ी इतनी सारी बातें बोली और कही जाती हैं कि इस बात पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है कि आखिर कौन सी बात सही है और कौन सी गलत? सेक्स को लेकर अक्सर लोगों के दिलो-दिमाग में कई गलत धारणाएं और भ्रांतियां भी होती हैं। जानें, सेक्स से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातों के बारे में जो पूरी तरह से गलत हैं और उनकी हकीकत क्या है….

मिथक: मेनॉपॉज के बाद सेक्स में कम हो जाती है दिलचस्पी
हकीकत: मेनॉपॉज के दौरान और उसके बाद भी बहुत सी महिलाएं ऐसी हैं जो अपने हॉर्मोनल बैलेंस के साथ-साथ सेक्स में इंट्रेस्ट को भी बरकरार रखती हैं। प्रेग्नेंसी और मेन्स्ट्रूएशन के वक्त भी अब सेक्स को लेकर किसी तरह की कोई चिंता नहीं रहती क्योंकि ज्यादातर महिलाएं इतनी समझदार और कॉन्फिडेंट हो गई हैं कि उन्हें पता है कि उन्हें क्या चाहिए।

मिथक: लिबिडो के लिए सबसे अहम हॉर्मोन टेस्टोस्टेरॉन है
हकीकत: हालांकि महिलाओं और पुरुष दोनों में ही लिबिडो यानी कामेच्छा के लिए टेस्टोस्टेरॉन काफी अहमियत रखता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यही एक मात्र हॉर्मोन है। सेक्शुअल फंक्शन्स के दौरान बाकी हॉर्मोन्स की भी उतनी ही अहमियत होती है। मेल-फीमेल दोनों में सेक्स के प्रति इच्छा जगाने में एस्ट्रोजन का भी अहम योगदान होता है। साथ ही अगर शरीर में कॉर्टिसोल का लेवल बढ़ जाए तब भी कामेच्छा में कमी आ जाती है।

मिथक: सच्चा प्यार हो तो सेक्स की इच्छा खुद आ जाती है
हकीकत: किसी से रियल कनेक्शन बनवाने और रिलेशनशिप बकरार रखने के लिए काफी समय और एनर्जी देनी पड़ती है। अपने पार्टनर और उसके इंट्रेस्ट पर फोकस करें। आप देखेंगे कि ऐसा करने से पार्टनर के साथ आपका कनेक्शन और ज्यादा स्ट्रॉन्ग हो जाएगा और जब कनेक्शन स्ट्रॉन्ग होगा तो सेक्स की इच्छा और लिबिडो दोनों बढ़ जाएंगे।

मिथक: महिलाओं में पुरुषों जितनी सेक्स की लालसा नहीं होती
हकीकत: महिलाओं की कामेच्छा पुरुषों से कम होती है और महिलाओं में सेक्स के प्रति उतनी लालसा नहीं होती जितना पुरुषों में होती है। 2017 की एक स्टडी में यह बात सामने आयी थी कि 60 प्रतिशत महिलाएं अपने मेल पार्टनर से ज्यादा सेक्स करना चाहतीं थीं।