
लखनऊ।NKB:-ht: नवाबों के दौर में जब बेगमात की सवारी चलती थी तो उनका सर-ओ-सामान (यात्री सामान) उनकी डोली में होता था। उसी सामान के साथ होता था उनका पानदान। पानदान बेगमों का बैंक होता था। उसी में उनके जेवरात और अशर्फियां हुआ करती थी। चोर-डाकू उसी कीमती सामान को लूटने की फिराक में रहते थे। लखनऊ के ऐसे कई इलाके हैं जिनके नाम चोर-डाकूओं के कारण भी पड़ गए, जैसे ‘अंधे की चौकी’, ‘चोर घाटी’ आदि। ‘अंधे की चौकी’ पर लूट होती थी और ‘चोर घाटी’ में चोरी के माल का बटवारा होता था।
‘अंधे की चौकी’ का नाम रखे जाने का दिलचस्प किस्सा सुनाते हुए मशहूर इतिहासकार योगेश प्रवीण कहते हैं कि “हरदोई रोड स्थित काकोरी इलाके से बेगमात की सवारी को लखनऊ आने के दौरान लूट लिया जाता था। बेगमों ने इसकी शिकायत नवाब साहब से की, जिन्होंने फौरन लूट होने वाले मकाम (स्थान) पर एक चौकी तामीर (निर्माण) करने का हुक्म दिया।” वे बताते हैं कि उसके बाद कुछ दिनों तक तो लूटपाट बंद रहा लेकिन उसके बाद घटनाएं दोबारा शुरू हो गई। योगेश प्रवीण बताते हैं कि, “दोबारा लूटपाट शुरू होने पर बेगमों ने नवाब से इसकी फिर शिकायत की। नवाब साहब बेहद नाराज होते हुए बोले कि उसी को तो रोकने के लिए चौकी बनवाई थी। इसपर बेगम ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया कि लूट के वक़्त तो चौकीदार अंधा हो जाता है।” इतिहासकार योगेश प्रवीण बताते हैं कि इसी के बाद से उस चौकी को लोग ‘अंधे की चौकी’ पुकारने लगे।
मेयर संयुक्ता भाटिया ने शहर ‘अंधे की चौकी’ और ‘लंगड़ा फाटक’ जैसी नामों को बदलने का मन बनाया है। उनका कहना है कि, “यह गलत है। पहले ऐसे नाम होते थे लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शारीरिक तौर पर अक्षम लोगों को दिव्यांग कहा है। इसलिए हमने इन जगहों का नाम बदलने का फैसला किया है।” बताया जा रहा है कि जल्द ही उनका नाम बदलकर किसी महापुरुष के नाम पर रखा जाएगा। इस बात की घोषणा मेयर ने पिछले दिनों ब्रेल लिपि के जनक लुई ब्रेल की जयंती समारोह के अवसर पर की थी