विधुत विभाग का धरना, “पुरानी पेंशन नहीं तो वोट नहीं”

बाँदा जिले में विधुत विभाग के संविदा कर्मचारियों के संगठन विधुत कर्मचारी सयुक्त संघर्ष समिति के सैकड़ो कर्मचारियों ने दो दिन की सांकेतिक हडताल कर जोरदार धरना प्रदर्शन किया और पावर कारपोरेसन पर ताला जड़कर कार्य बहिस्कार किया । विधुत कर्मचारियों ने कहा की जो सरकार सरकार ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण को बंद करेगी एवं पुराणी पेन्सन नीति को बहाल करेगी उसी को वोट देंगे । विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार आज पीली कोठी पावर हॉउस प्रांगण में बाँदा जनपद के समस्त विधुत अभियंता व कर्मियों ने दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जोरदार धरना-प्रदर्सन कर कार्य बहिस्कार कर आंदोलन को प्रारम्भ किया जिसमे बैंक यूनियन के पदाधिकारी भी सम्मिलित हुए ।

सभा को सम्बोधित करते हुए विधुत कारपोरेसन के महामंत्री अनिल यादव ने कहा की सूबे एवं केन्द्र सरकार कर्मचारियों और अभियंताओं के आंदोलन को संज्ञान में लेते हुए इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेन्ड बिल 2018 वापस ले अन्यथा की स्थिति में समस्त बिजलीकर्मी आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे । बिजलीकर्मियों ने कहा की सरकार निजी घरानों से महँगे दामों पर बिजली खरीदना बंदकर सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों से बिजली खरीदे एवं उनका समय-२ पर रख-रखाव व मरम्मत किया जाना सुनिश्चित करें, साथ ही साथ ऊर्जा क्षेत्र व पावर कारपोरेसन में ठेकेदारी व्यवस्था एवं निजीकरण पर प्रभाव से रोक लगाए । कहा की सरकार अविलम्ब उ०प्र राज्य विधुत परिषद् का पुनर्गठन कर आगरा एवं नोएडा की फ्रेंचाइजी को निरस्त करें । कहा की सूबे एवं केंद्र की सरकारें देश-प्रदेश के समस्त कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाल करें, अन्यथा समस्त नेताओं की परिवारिक पेंशन को बंद करें,यदि ऐसा नहीं होता तो देश और प्रदेश के तमाम अधिकारी व कर्मचारी पेंशन नहीं तो वोट नहीं के सिद्धांत पर अमल करेंगे । धरने-प्रदर्सन के दौरान कर्मचारियों ने शपथ ली की जो सरकार सरकार ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण को बंद करेगी एवं पुराणी पेन्सन नीति को बहाल करेगी उसी को वोट देंगे ।