
सिधौली-सीतापुरHT: नर हो या नारी शिक्षा सबके विकास की धुरी है इस बात का महत्त्व फुले दम्पति ने बहुत पहले रेखांकित किया था यह बात शिक्षा की देबी सावित्री बाई फुले के जन्मोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एडवोकेट हेमनाथ गौतम ने कस्बा के रामलीला हॉल में कही
सावित्री बाई फुले मंच के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने आगे कहा कि सावित्री बाई फुले ने महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार खोल दिया जो सदियों से बन्द थे आज जो महिला शिक्षित है वह इस महान ब्यक्तित्व की सदा कर्जदार है लेकिन दुर्भाग्य इस देश का कि अधिसंख्य भारतीय महिलाएं अपने इस उद्धारक को सम्मान देने से कतरा रही है 
राजेश कश्यप ने कहा कि भारत के विकास के लिए जितना योगदान शैक्षिक क्रांति की अग्रदूत सावित्री बाई फुले का है उतना शायद किसी का नहीं क्योंकि इन्होंने शिक्षा की रोशनी देश के पचास फीसदी तबके पर पहुँचायी जहां पर उस समय महिलाओं को शिक्षित करना सबके बस की बात नहीं थी आज इन्हीं की बदौलत भारत दिन दूना रात चौगुना तरक्की करता जा रहा है किन्तु भारत के अगुआकारों ने ऐसी महान शिक्षा की साक्षात देबी को भारत रत्न से सम्मानित करना वाज़िब नही समझा यह भारत के अब तक के अगुआकारों के लिए नहीं अपितु हम सबके लिए भी चिंतनीय विषय है l ओपी मौर्या ने कार्यक्रम संचालन करते हुए कहा कि आज के दौर में भारत को राष्ट्र माता सावित्री बाई फुले के बताये रास्ते पर चलना चाहिए तभी राष्ट्र का बेहतर विकास होगा अन्त में उपस्थित गणमान्य लोगों ने बच्चों को शिक्षा के लिए स्टेशनरी देकर प्रोत्साहित किया l कार्यक्रम की अध्यक्षता रामगोपाल ने किया