
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच एक श्रीलंका की रहने वाली महिला ने भगवान अयप्पा के दर्शन कर लिए हैं। इस महिला की उम्र 46 साल है। पुलिस ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि ससिकला ने 18 कदमों के जरिए मंदिर में दाखिल हुई जिन्हें पथिनेत्तामपड़ी भी कहा जाता है। वह गुरुवार रात 9.30 बजे मंदिर पहुंची।
जानकारी के अनुसार वह रात के 11 बजे पंपा बेस कैंप में वापस आ गईं। उन्हें रास्ते में किसी ने भी नहीं रोका। वह अपने रिश्तेदारों के साथ मंदिर पहुंची थीं। ससिकला और उनके रिश्तेदारों ने पुलिस को मंदिर में दर्शन करने के अपने फैसले के बार में बताया और उसकी उम्र की पुष्टि करने वाले दस्तावेज जमा करवाए। ससिकला के पास श्रीलंका का पासपोर्ट था जिसके अनुसार उसका जन्म 1972 में हुआ है।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार महिला को सुरक्षा दी गई। जिसमें बिना वर्दी वाली महिला कांस्टेबल भी शामिल थीं। ससिकला ने पुलिस को बताया था कि वह मेनोपॉज (मासिक धर्म का बंद हो जाना) पर पहुंच गई है। उसके पास इसका प्रमाणपत्र भी था। महिला ने कहा, ‘मैं पवित्र सीढ़ियों पर चली लेकिन मुझे आगे नहीं जाने दिया गया। मेरे पास मेडिकल सर्टिफिकेट भी है।’
इससे पहले 2 जनवरी को दो महिलाओं बिंदु और कनकदुर्गा ने मंदिर में प्रवेश किया था। जिसके परिणामस्वरूप पूरे राज्य में बड़े स्तर पर हिंसा फैल गई। वाट्सऐप पर 40 साल की महिलाओं का पवित्र स्थल पर जाने का वीडिया वायरल हो गया। यह खबर सार्वजनिक होने के बाद मुख्य पुजारी ने मंदिर को कुछ समय के लिए बंद कर दिया ताकि शुद्धिकरण की रीतियां की जा सकें।
10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं का सबरीमाला मंदिर में प्रवेश वर्जित है क्योंकि माना जाता है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं। सितंबर में उच्चतम न्यायालय ने बरसों पुरानी परंपरा के खिलाफ अपना फैसले देते हुए सभी उम्र की महिलाओं के लिए मंदिर के दरवाजे खोल दिए थे। जिसके बाद केरल में हिंसा भड़क गई थी। भाजपा और कांग्रेस ने राज्य की पिनरई विजयन सरकार पर मंदिर की परपंरा को तोड़ने का आरोप लगाया था।
सबरीमला मंदिर में रजस्वला उम्र की दो महिलाओं के प्रवेश करने के बाद पिछले दो दिनों में दक्षिणपंथी समूहों के हिंसक प्रदर्शनों के सिलसिले में अभी तक 266 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी थी। पुलिस ने बताया था कि 334 लोगों के एक समूह को एहतियातन हिरासत में लिया गया।
उन्होंने बताया कि हिंदू संगठनों की हड़ताल के कारण राज्य में हुई व्यापक हिंसा के बाद पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन ब्रोकन विंडो’ चलाया। पुलिस ने एक विज्ञप्ति में बताया कि विशेष शाखा हिंसा में शामिल लोगों की सूची तैयार करेगी और उसे आगे की कार्रवाई के लिए जिला पुलिस प्रमुखों को सौंपेगी।
विज्ञप्ति में बताया गया है कि हिंसा के दोषियों की एक फोटो एलबम भी तैयार की जाएगी। हिंसा में शामिल आंदोलनकारियों को गिरफ्तार करने के लिए विशेष दल भी गठित किए जाएंगे। बंद के दौरान एक प्रदर्शनकारी की मौत जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे जिनमें 38 पुलिसवाले भी शामिल थे।