मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जीडी बख्शी ने कहा कि शांति के कबूतर उड़ाने वाले देश को बर्बाद कर रहे हैं।
एक ऐसा वर्ग है जो अपने नोबेल पुरस्कार पाने के लालच में सरकार को आगे नहीं बढ़ने दे रहा है।
जनरल बख्शी देहरादून में एक कार्यक्रम के दौरान कश्मीर में चल रही आतंकवादी गतिविधियों और पाकिस्तान से भारत के संबंधों पर बोल रहे थे।
बातचीत और शांति से कुछ नहीं होने वाला
उन्होंने सीधे कहा कि बातचीत और शांति से कुछ नहीं होने वाला। पाकिस्तान से उसकी ही भाषा में बात करनी होगी।
वर्तमान मोदी सरकार के बारे में भी उन्होंने कहा कि जितनी उम्मीद सरकार से थी उससे अभी बहुत कम पूरी हुई है।
उम्मीद यही है कि सरकार लोगों की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी व कश्मीर और पूरे देश में चल रही इस समस्या का हल होगा।
मोहयालों की गाथा का बखान किया
कश्मीर के चुनाव की संभावनाओं के बारे में उन्होंने वहां के 250 लोगों के बारे में बात की। कहा कि जब तक सेना इन 250 लोगों का सफाया नहीं करती। तब तक वहां चुनाव या किसी भी लोकतंत्रिक प्रक्रिया को शुरू करना गलत होगा।
बख्शी देहरादून में एक स्कूल के कार्यक्रम में भाग लेने आए हुए थे। यहां उन्होंने बच्चों को भी संबोधित किया तो अपनी चिर-परिचित शैली में ही किया।
उन्होंने रामायण काल से लेकर मध्यकालीन भारत में मोहयालों की गाथा का बखान भी किया। मोहयाल ब्राह्मण जाति की शाखा है बख्शी खुद भी मोहयाल हैं।