
क्या भाजपा और संघ परिवार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है? क्या संघ परिवार एक बार फिर राम मंदिर को लेकर कसमकस में फंस गया है? इस सवाल पर संघ के अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। भाजपा भी इस पर खुलकर नहीं बोल रही है। कोई स्पष्ट अधिकारिक बयान भी सामने नहीं आ रहा है। संघ मामलों के जानकार सूत्र का कहना है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर कानून लाने की मांग पर संघ की दुविधा बढ़ गई है। वस्तुस्थिति यह है कि संघ राम मंदिर निर्माण के मुद्दे से अलग नहीं हो सकता। जबकि भाजपा खुद को इससे जुड़ा रख पाने में अधिक असहज हो रही है। बताते हैं इस तरह के कई मुद्दे हैं जहां संघ और भाजपा में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
संघ के एक अधिकारी का कहना है कि कांग्रेस मुक्त भारत की बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कभी नहीं की। सूत्र का कहना है कि यह कभी भी संघ का दर्शन नहीं रहा। यह कहां से अया और इसको लेकर आगे की क्या स्थिति रहेगी, इसे लेकर दुविधा की स्थिति है। इसी तरह से राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर संघ की राय है कि राम मंदिर बनना चाहिए। इसके लिए सार्थक पहल होनी चाहिए। राम मंदिर आंदोलन संघ की देख रेख में चला है। राम मंदिर का निर्माण लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है। इसका सीधा संबंध लोगों से है, लेकिन भाजपा पिछले इसके लिए अदालत के निर्णय का इंतजार करने के पक्ष में है। भाजपा के नेता इसे चुनाव और अपने राजनीतिक उद्देश्य के लिहाज से बड़ा मुद्दा नहीं मानते। बताते हैं कि राष्ट्रीय स्वयं संघ के अधिकारियों से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की बैठकों में इन सभी बिन्दुओं पर चर्चा हुई है। इतना ही नहीं भाजपा के कई शीर्ष नेता पार्टी और सरकार में चल रहे कई तरह के प्रयोगों से सहमत नहीं है, लेकिन कोई भी खुलकर सामने नहीं आ रहा है। भाजपा के संस्थापकों में रहे एक वरिष्ठ नेता की खिन्नता लगातार बढ़ती जा रही है। वह मानते भी हैं कि स्थितियां ठीक नहीं है, लेकिन वह नाम प्रकाशित करने से बचना भी चाहते हैं। इतना ही नहीं दो वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्री लगातार संघ को अपनी तकलीफदेह राय से संघ को अवगत करा रहे हैं।
मतभेद तो है
संघ की हर बात केन्द्र सरकार मान ले, जरूरी नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार और आईजीएनसीए के चेयरमैन राम बहादुर राय और राहुल देव दोनों का कहना है कि सरकार संविधान के विरुद्ध काम कैसे कर सकती है? राम बहादुर राय का कहना है कि संघ और विहिप के सामने दुविधा है। उनकी चिंता इस बात की है कि केन्द्र और राज्य में भाजपा की सरकार है। इसके बाद भी राममंदिर निर्माण नहीं हो रहा है। वह लोगों को क्या जवाब देंगे? इसलिए दोनों ने सरकार से यह सवाल पूछा है। सरकार इस मामले में उच्चतम न्यायालय को हाशिए पर रखने या उसकी अवमानना नहीं करना चाहती। इसलिए केन्द्र सरकार 4 जनवरी से उच्चतम न्यायालय में शुरू हो रही सुनवाई पर निर्भर है। इसी को केन्द्र में रखकर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लखनऊ में अपना बयान दिया है।
राहुल देव मानते हैं कि राम मंदिर निर्माण और आध्यादेश लाने, कानून बनाने की मांग संघ की तरफ से आई थी। मोहन भागवत ने राम मंदिर निर्माण में हो रही देरी को लेकर आक्रोश का जिक्र किया था, लेकिन यह 1992 नहीं है। भावना भड़काना अलग बात है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि का ख्याल है। वह संविधान, मर्यादा सबकुछ केन्द्र में रखकर ही आगे बढऩा चाहते हैं।
प्रयागराज कुंभ-2019
प्रयागराज में कुंभ का आयोजन बहुत भव्य तरीके से हो रहा है। कुंभ के आयोजन को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहमत रहे। 2019 के कुंभ का आयोजन अब तक का सबसे भव्य, सुंदर और विहंगम हो रहा है। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका व्यापक प्रचार, प्रसार चल रहा है। करोड़ों लोगों के आस्था के कुंभ में डुबकी लगाने का भरोसा है। इन सबके बावजूद राम मंदिर पर अभी स्थिति साफ नहीं है। संघ चाहता है कि राम मंदिर पर स्पष्टता हो, भाजपा अदालत के फैसले का इंतजार कर रही है, संघ के रास्ते पर ही विश्व हिन्दू परिषद है और ऐसे में साधु संत, समाज की स्थिति भी साफ नहीं है। राम मंदिर निर्माण पर प्राइवेटमेंबर लाने की घोषणा कर चुके राज्यसभा सदस्य राकेश सिन्हा अब इस मुद्दे पर चर्चा से कतरा रहे हैं। वह फोन नहीं उठाते। महंत नृत्यगोपाल दास के करीबी बताते हैं, वह इस मुद्दे पर कुछ खुलकर बोल नहीं पा रहे हैं। डा. राम विलास वेदांती जैसे राम कथा वाचक और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े साधु की हालत दयनीय सी है। योगी आदित्यनाथ ने फिलवक्त राम जन्मभूमि परिसर में भव्य राम की प्रतिमा लगाने का रास्ता अख्तियार कर रखा है। ऐसे में अब साधु-संत समाज खुद के भरोसे पर है। वह राम मंदिर निर्माण पर अपने हिसाब से अपनी राय रखेगा, लेकिन मूल में यह है कि सब बंटे हुए हैं।
विज्ञान भवन के बाद
सर संघ चालक मोहन भागवत ने दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सीमाओं में विस्तार कर दिया था। इसके बाद वह राम मंदिर निर्माण पर भी बोले थे। मेहन भागवत के राम मंदिर पर उस वक्तव्य का अब संघ और संघ के अनुषांगिक संगठनों से अलग हो चुके नेताओं को इंतजार है। अपना अंतरराष्ट्रीय विश्वहिन्दू परिषद बना चुके प्रवीण भाई तोगडिय़ा साफ कहते हैं कि यह संघ की भाजपा के साथ राम मंदिर के निर्माण का माहौल बनाने की कोशिश थी या कुछ और मोहन भागवत बताना चाहिए। क्या भाजपा संघ की बातों को नहीं मान रहा है? यह चुप्पी क्यों है? इसे संघ को स्पष्ट करना चाहिए। संघ को जनता को बचाना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उसकी नहीं सुन रहे हैं, लेकिन भाजपा के राजनीतिक हित को ध्यान में रखकर चुप है। प्रवीण भाई तोगडिय़ा से जब यह पूछा गया कि क्या मोहन भागवत का मॉडल फेल हो गया तो उन्होंने कहा कि इस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ही अपनी बात रखनी चाहिए। विहिप के अधिकारी चंपक राय भी इस विषय में कुछ नहीं कहना चाहते।