
योगी की पुलिस का एक अपना ही कानून है, रेल दुर्घटना में मारे गए एक व्यक्ति को अलीगढ़ के थाना गांधी पार्क ने पुलिस रेप्युटेशन को दरकिनार करते हुए मानवता को भी शर्मसार कर दिया, मृतक विकलांग दलित युवक के शव को बजाय किसी कानूनी कार्रवाई के परिजनों को सुपुर्द कर दिया, जहां ना तो किसी वाहन का इंतजाम था और ना ही पुलिस की ओर से कोई मदद,,,, अंत यह हुआ कि दलित मृतक का भाई और उसके परिजन शव को चारपाई पर रखकर घर तक ले जाने को मजबूर हो गए, देखिए पुलिस का अमानवीय चेहरा,,,,,,,,,,!! दरअसल अलीगढ़ के थाना गांधी पार्क इलाके के छावनी निवासी दलित परिवार से ताल्लुक रखने वाला 24 वर्षीय दिनेश जो कि परिवार के भरण पोषण के लिए मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार के साथ रहता था.
परिजनों के मुताविक कल देर शाम दिनेश घर से खाना पीना खाकर निकला हुआ था, कुछ देर बाद ही दलित युवक दिनेश के परिजनों को सूचना मिली कि,,,,दिनेश की मौत ट्रेन की चपेट में आकर हो गई है, सूचना पाकर मौके पर परिजन पहुंच गए,,,जहां पुलिस और परिजनों के बीच वार्तालाप होना शुरू हो गया, पुलिस ने मृतक के संबंध में पूरी जानकारी विस्तारपूर्वक जुटा ली, ट्रेन हादसे में गई दलित युवक दिनेश की जान के बाद पुलिस को यहां से शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंपना था, लेकिन यहाँ किसी भी तरह की कानूनी प्रक्रिया न करते हुए अलीगढ़ पुलिस ने अपने ही कानून से बिना किसी जांच और पंचनामा भरे मृतक का शव परिजनों को सौंप दिया,,,, हद तो तब हो गई जब मृतक दिनेश का भाई राजेश कुमार अपने अन्य परिजन-स्थानीय लोगों कि मदद से मृतक के शव को मौके से चारपाई पर डालकर घर तक ले गए, पुलिस ने यहां इतनी भी जहमत नहीं उठाई की मृतक का शव,,, घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती,,,,,,। मौके पर मौजूद मीडिया कर्मी द्वारा बनाई जा रही वीडियो के दौरान पुलिस कैमरे की नजर से बचती नजर आई।
अब यहां सवाल यह उठता है कि आखिर पुलिस कौन होती है बिना किसी चिकित्सक के किसी को मृत घोषित करने वाली, पुलिस ने यहां पूछताछ कर अग्रिम कार्रवाई तक शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया, पुलिस ने बिना किसी जांच किए इस घटना को मात्र एक एक्सीडेंट ही क्यों मान लिया, अगर कल को परिजन या उसके रिश्तेदार किसी पर आरोप प्रत्यारोप लगाते हुए फिर से पुलिस की चौखट पर पहुंच गए तो उस वक्त इस दलित युवक मृतक दिनेश को इंसाफ पुलिस कैसे दिलाएगी, क्या योगी सरकार की पुलिस मुकदमे के रिकॉर्ड को इसी तरह कम करने में जुटी है।