नीरव मोदी और माल्या ही नहीं, 58 भगोड़ों को वापस लाना चाहती है सरकार

पिछले दिनों ब्रिटेन की कोर्ट से भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण को मंजूरी मिलने से भारतीय जांच एंजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है. सरकार माल्या के अलावा नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, चेतन संदेसरा, ललित मोदी और नितिन समेत करीब 58 भगोड़ों कारोबारियों को वापल लाना चाहती है. सरकार की तरफ से बुधवार को इस बारे में संसद में जानकारी दी गई. ये सभी भगोड़े देश में घोटाले करने के बाद विदेशों में रह रहे हैं. इन सभी के लिए इंटरपोल में रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने और प्रत्यर्पण की मांग की गई है.

डीआरआई ने 16 अन्य के प्रत्यर्पण की मांग की

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के अनुसार सरकार की तरफ से यह भी बताया गया कि इन सभी भगोड़ों के अलावा सरकार और सीबीआई, ईडी, डीआरआई ने 16 अन्य के प्रत्यर्पण की मांग यूएई, यूके, बेल्जियम, इजिप्ट, अमेरिका, ऐंटीगुआ जैसे देशों से की है. विदेश मंत्रालय के तरफ से बुधवार को लोकसभा में एक जवाब में बताया गया है कि अक्टूबर में वीवीआईपी हेलीकॉप्टर खरीद घोटाले में दो अन्य बिचौलियों के प्रत्यर्पण की मांग इटली से की गई है. इससे पहले सीबीआई ने कार्लो जीरोसा के प्रत्यर्पण की मांग नवंबर 2017 में और गुइडो हैश्क के प्रत्यर्पण के लिए जनवरी 2018 में मांग की थी.

हेलीकॉप्टर घोटाले की जांच में बड़ी कामयाबी की उम्मीद

जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि कार्लो जीरोसा और हैश्क के प्रत्यर्पण से वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले की जांच में बड़ी कामयाबी मिल सकती है. इस मामले में क्रिश्चयन मिशेल का पहले ही यूएई से प्रत्यर्पण करा लिया गया है. भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के बारे में विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि उसके खिलाफ पहले ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो चुका है. इसके अलावा इंग्लैंड में उसके खिलाफ प्रत्यर्पण की दो अन्य मांगें भी भेजी जा चुकी हैं. नीरव मोदी के भाई नीशल और उसके सहयोगी सुभाष परब के लिए भी यूएई से प्रत्यर्पण की मांग की गई है.