
समाजवादी पार्टी का नाश करके खुद का राजनीतिक प्लेटफार्म तैयार करने वाले शिवपाल यादव की नवगठित प्रगतिशील समाजवादी पार्टी की जन आक्रोश रैली में मुलायम सिंह यादव के पंहुच जाने का क्या अर्थ है ! 
क्या मुलायम सिंह ने अपने पुत्र अखिलेश का साथ छोड़कर अनुज शिवपाल यादव का साथ देने का फैसला कर लिया है ! क्या मुलायम पुत्र अखिलेश की हठ से गुस्सा कर अपनी ही बनायी हुई समाजवादी पार्टी को खत्म करके भाई की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी को आगे बढ़ाएंगे ! 
या फिर शिवपाल और अखिलेश में समझौता करने की आखिरी कोशिश के लिए अखिलेश पर दबाव बनाने के लिए मुलायम जन आक्रोश रैली में पंहुचे हैं !
या फिर प्रगतिशील समाजवादी समाजवादी पार्टी को सपा-बसपा गठबंधन मे शामिल करने का कोई विचार है !
भाजपा सरकार पर कम और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर ज्यादा आक्रोश व्यक्त करने वाली जन आक्रोश रैली में मुलायम के पंहुच जाने से राजनीतिक गलियारों में तमाम सवाल उभरने लगे हैं !
सपा संरक्षण मुलायम सिंह यादव एक मियान में दो तलवारें कैसे रख सकते हैं ! एक दूसरे की प्रतिद्वंद्वी पार्टियों के संरक्षक और मार्गदर्शक कैसे हो सकते हैं !
मुलायम का बेहद मुलायम रवैया और गोल-मोल बातें अंततोगत्वा किस करवट फाइनल सूरत में सामने आयेंगी !
सपा का पारंपरिक वोट बैंक मुस्लिम और यादव समाज भी अपने नेता जी के स्पष्ट फैसले के इंतजार में थक गया है।
तमाम सवाल तैर रहे हैं। सवालों की कतारों में अपनी नज्म की सूरत में एक सवाल करके बात खत्म करता हूं-
चांद तारों को जमीं पर कैसे ला पाओगे तुम,
जुगनुओं को रोशनी में कैसे चमकाओगे तुम।
या अंधेरे में रहो या फिर उजाला छांट लो,
रोशनी रहते अंधेरा कैसे पा पाओगे तुम,
या हुआ अपनाओ या फिर बेहया हो जाओ तुम,
आंखों से आंखे मिलाकर कैसे शर्माओगे तुम।।
-नवेद शिकोह
8090180256