
देहरादून नगर निगम के महापौर पद पर निर्वाचित भाजपा के सुनील उनियाल गामा रविवार को महापौर पद की शपथ लेंगे। इसके साथ ही वह सीमा विस्तार के बाद 60 से 100 वार्डों में तब्दील हो चुके नगर निगम के पहले महापौर भी होंगे। उन पर शहर के पुराने वार्डों को बेहतर बनाने के साथ ही शहर का हिस्सा बने ग्रामीण क्षेत्रों में नए सिरे से विकास की पटकथा लिखने की जिम्मेदारी भी होगी। आइए जानते हैं दून को बेहतर बनाने के लिए उनकी प्राथमिकताएं क्या हैं।
सवाल: महापौर पद पर आसीन होने के बाद बेहतर दून के लिए आप सबसे पहले किन कार्यों पर फोकस करेंगे।जवाब: सबसे पहले मेरा फोकस दो कार्यों पर रहेगा। एक तो शहर की सफाई व्यवस्था के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी और फिर शहर के बाहरी इलाकों में स्ट्रीट लाइट के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
सवाल: हाल ही में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान में जो सड़कें चौड़ी की गई हैं, उनकी बेहतरी और सड़कों को अतिक्रमणमुक्त बनाने के लिए क्या प्लान है।
जवाब: देहरादून जैसे शहर में चौड़ी सड़कों की बेहद जरूरत है। सरकार के प्रयास से तमाम सड़कों से अतिक्रमण हटाए गए हैं। अधिकारियों के साथ बैठक कर उनसे कार्ययोजना प्राप्त की जाएगी और उसे जल्द अमलीजामा पहनाने के प्रयास भी होंगे।
सवाल: क्या आपको लगता है कि दून की स्थिति अभी अस्त-व्यस्त सी नजर आती है। यदि इस बात से इत्तेफाक रखते हैं तो दून की व्यवस्थाओं को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।
जवाब: यह बात सही है और खासकर दून के बाजारों की दशा बेहद खराब है। विभिन्न बाजारों में पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी और ठेली माफिया पर भी अंकुश लगाया जाएगा। क्योंकि अभी जितनी ठेलियां पंजीकृत हैं, उससे कहीं अधिक सड़कों पर नजर आती हैं। इससे यातायात में व्यवधान पैदा होता है।
सवाल: प्रमुख सड़कों पर पार्किंग एक बड़ी समस्या बन गई है। दून में बेहतर पार्किंग के लिए कोई प्लान तैयार करवाएंगे?
जवाब: सड़कों पर जाम के लिए खराब पार्किंग व्यवस्था जिम्मेदार है। जानकारी मिली है कि एमडीडीए व पुलिस ने इस दिशा में कुछ कसरत की है। इन्हें धरातल पर उतारा जाएगा और नए पार्किंग स्थल भी तलाश किए जाएंगे।
सवाल: जब भी नगर निगम को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाई जाती है तो निगम प्रशासन संसाधनों की कमी का हवाला देकर दोष सरकार पर मढ़ देता है। क्या यह सही है और इस स्थिति को कैसे सुधारा जा सकता है।
जवाब: नगर निगम को साधन संपन्न बनाने के प्रयास होंगे। हालांकि सरकार के सहयोग के बिना यह संभव नहीं है। खुद के संसाधन व सरकार के सहयोग के बीच सामंजस्य बनाकर काम किया जाएगा।