
भारत में कम ही महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं और गर्भ टालने के लिए दूसरे ही तरीके अधिक लोकप्रिय हैं। कई लोगों को यह भ्रम भी है कि अन्य दवाइयों की तरह इसके भी कुछ साइड-इफ़ेक्ट्स या नुकसान होते हैं । किन्तु, जानकारों के अनुसार इसके कोई नुकसान नहीं हैं; बल्कि गर्भ टालने के अलावा इसके कई अन्य लाभ भी हैं । इसके क्या-क्या अन्य लाभ हैं, यहाँ जानिये:-
मासिक-धर्म के चक्र (साइकल) को नियंत्रित करना
यह कैसे हो सकता है उसे समझने के लिये इन गोलियों की पेकिंग को ध्यान से देखिये । अधिकतर पेकिंग में 28 गोलियां होती हैं; जिनमें से 21 एक्टिव (हार्मोन वाली) और 7 इनेक्टिव (हार्मोन रहित) होती हैं । समान्यतः जिन दिनों इनेक्टिव पिल्स ली जाती हैं, उन्हीं दिनों में पीरियड्स होते हैं । इसलिए महिलाएं चाहे तो अधिक दिन एक्टिव पिल्स लेकर पीरियड्स को और अधिक टाल सकती हैं ।
पीरियड्स के दर्द में राहत
गर्भाशय में प्रोस्टेग्लेडीन नामक एक हार्मोन का स्राव होता है । इस हार्मोन का अधिक स्राव होने से पीरियड्स के दिनों में दर्द रहता है । क्योंकि इससे गर्भाशय में संकुचन होता है और क्रेम्प्स बनते हैं गर्भनिरोधक गोलियां लेने से ओवुलेशन कम होता है और इस हार्मोन का स्राव भी कम होता है । इसलिए पीरियड्स में होने वाला दर्द भी कम होता है ।
कैंसर के खतरे को कम करना
ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित एक शोध के अनुसार गर्भनिरोधक गोलियां और गर्भावस्था दोनों शरीर में हार्मोन के संतुलन पर सकारात्मक असर डालती हैं । इससे विशेषकर डिंबाशय के कैंसर का खतरा कम हो सकता है । इस शोध की अध्ययनकर्ता नाओमी एलेन ने बीबीसी केई माध्यम से कहा है कि अध्ययन के ये परिणाम बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अधिकांश महिलाओं को यह मालूम नहीं है कि गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से और उनके गर्भ-धरण करने से उनकी डिंबाशय के कैंसर से सुरक्षा होती है; और यह कैंसर ऐसा है कि इसका जल्दी पता लगना मुश्किल होता है; इसलिए इससे यथासंभव बचाव ही अच्छा उपाय है ।
मुहाँसे और त्वचा की समस्याओं में कमी
मुहांसों की समस्या और त्वचा की कुछ और समस्याओं का मुख्य कारण हार्मोन्स का असंतुलन होता है । गर्भनिरोधक गोलियां हार्मोन्स को संतुलित रखने में मदद करती हैं इसलिए ये ऐसी समस्याओं को भी कम करती हैं । यह मुहांसों आदि के दूसरे कई इलाजों से बेहतर विकल्प है।