
अभी तक अनगिनत जहाज समुद्र में समा चुके हैं। एक अंदाजे के मुताबिक हर साल लगभग 10 बड़े मालवाहक जहाज समंदर में समा जाते हैं। और इन जहाजों पर सवार कर्मचारी बेमौत मारे जाते हैं। कार्गो जहाजों में धातुओं के जो अयस्क लादे जाते हैं, अक्सर वो केमिकल रिएक्शन से गलने लगते हैं। इस प्रक्रिया को लिक्विफैक्शन कहते हैं।
2015 में 56 किलो टन का मालवाहक जहाज ज्यूपिटर दक्षिण-पश्चिम वियतनाम के पास समुद्र में डूब गया था। इसमें सवार 19 कर्मचारियों में से सिर्फ एक बचाया जा सका था। इस हादसे के बाद इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन यानी (आईएमओ) ने कार्गों पर लादे जाने वाले एल्युमिनियम के अयस्क बॉक्साइट के बारे में चेतावनी जारी की थी।
दरअसल मालवाहक जहाजों पर माल लादते वक्त खास एहतियात बरतने की जरूरत होती है। लेकिन इसकी अनदेखी की जाती है। लापरवाही से माल लादने की वजह से जहाज के नीचे पानी में तेजी से उछाल होता है, जिसकी वजह से अयस्क हिलने-डुलने लगते हैं।
इससे जहाज के संतुलन पर असर पड़ता है। पानी का दबाव बढ़ने की वजह से माल कई बार जहाज के एक ही हिस्से में जमा हो जाता है। जहाज लंबे समय तक एक ही कोण पर झुका रहता है और गलने लगता है। यही नहीं कई बार जलपोत पानी में इतना ज्यादा झुक जाता है कि समुद्र का पानी इसमें आने लगता है और जहाज को डुबोने में अपना किरदार निभाता है। इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन ने लिक्विफैक्शन रोकने के लिए मानक तय किए हैं। जिसके मुताबिक ये तय कर दिया गया है कि कितनी नमी वाला सामान ले जाया जा सकता है। लेकिन फिर भी हादसे रुक नहीं रहे हैं।