
महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान रविवार को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ। सोमवार को खरना पूजा भी संपन्न हो गई। सोमवार शाम रोटी और गुड की बनी खीर का प्रसाद ग्रहण किया गया।
मंगलवार शाम को अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया जा रहा है और बुधवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह महापर्व संपन्न होगा। मंगलवार को बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मुंबई सहित देश के कई हिस्सों में मंगलवार शाम रंगारंग सास्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। इन कार्यक्रमों में भोजपुरी गायकों और डांसरों की बड़ी मांग होती है। राजनीतिक हस्तियों को इन कार्यक्रमों में अतिथि बनाकर बुलाया जाता है।

झारखंड: कोडरमा के चारडीह घाट के लिए दउरा लेकर जाती राजद प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी।

असम के गुवाहाटी में अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देती हुईं छठ व्रती

मेरठ के गगोल तीर्थ पर सांझ ढलने के साथ बढ़ रही भीड

प्रयागराज के संगम तट पर डाला छठ पूजन की तैयारी

बिहार में छठः मुजफ्फरपुर में दंड प्रणाम करते हुए घाट पर जाता श्रद्धालु

पूजा से पहले एक सेल्फी तो बनती है…

गुडगांव में घाट पर पहुंच रहे श्रद्धालु

गुडगांव में पूजन करती बुजुर्ग व्रती

ग्रेटर नोएडा के नवादा गांव में बने छठ घाट पर पूजा के लिए पहुंचने लगे श्रद्धालू
लुधियाना में श्री छठ पूजा पर श्रद्धालुओं की भीड़, सुबह से सड़कों पर लगा जाम

चंडीगढ़: छठ पर्व के लिए न्यू लेक में डाला गंगाजल
छठ पर्व के तीसरे दिन सूर्य को अर्घ्य देने के लिए न्यू लेक सेक्टर-42 में गंगाजल डाला गया। यह गंगाजल पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन की तरफ से हरिद्वार से लाया गया था और इसे लेक पर छठ पर्व की पूजा के लिए डाला गया है।
पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन ने गंगाजल लाकर न्यू लेक पर डाला
छठ पर्व के तीसरे दिन सूर्य को अर्ध्य देने के लिए चंडीगढ़ के न्यू लेक सेक्टर-42 में गंगाजल डाला गया। यह गंगाजल पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन की तरफ से हरिद्वार से लाया गया था और इसे लेक पर छठ पर्व की पूजा के लिए डाला गया है। जानकारी देते हुए एसोसिएशन के संयुक्त सचिव सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि छठ पर्व के तीसरे दिन एक लाख के करीब श्रद्धालु यहां पर आकर डूबते सूर्य को अर्ध्य देंगे और चौथे दिन यानि बुधवार को भी उगते सूर्य को अर्ध्य देकर व्रत को खत्म किया जाएगा।

बिहार में छठ

सिलीगुड़ी में संतोषी नगर घाट पर डाला उठना शुरू हो गया है
- 02:01 PM

प्रयागराज में भी डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी में व्रती महिलाएं
सूर्य षष्ठी (डाला छठ) की मुख्य पूजा आज शाम को होगी। इसकी तैयारी गंगा और यमुना के स्नानघाटों पर हो रही है। अस्ताचल सूर्य की पूजा नदी के जल में खड़ी होकर महिलाएं करेंगी। घाट पर होने वाली भीड़ को देखते हुए कई लोग दोपहर में ही पहुंचकर चादर, चटाई रखकर स्थान बुक कर लिया है। बाजार में पूजन सामग्री की खरीदारी हो रही हैछठ पूजा का पर्व सूर्य देव की आराधना के लिए मनाया जाता है। यह पर्व साल में दो बार, चैत्र शुक्ल षष्ठी और कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथियों को मनाया जाता है। इनमे से कार्तिक की छठ पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को छठ पूजा, डाला छठ, छठी माई, छठ, छठ माई पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा आदि कई नामों से बुलाया जाता है।
छठ पूजा की सफाई के लिए डीएम ने उठाया झाडू
छठ पूजा को ले पटना में सड़कों की सफाई, खुद जिलाधिकारी (डीएम) ने उठाया झाडू। -

तस्वीरों में देखें दुमका के खूंटा बांध तालाब का नजारा

छठ पूजा के कर्इ नाम हैं जैसे- छठ पूजा, छठ, छठी माई के पूजा, छठ पर्व, छठ पूजा, डाला छठ, डाला पूजा, और सूर्य षष्ठी आदि। इस व्रत में भगवान सूर्य की पूजा की जाती है और अस्तगामी एवं उदित होते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है और पूजा की जाती है। इस व्रत प्रसाद मांग कर खाने का विधान है। स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को एक बार भोजन करना चाहिए तत्पश्चात प्रातः काल व्रत का संकल्प लेते हुए संपूर्ण दिन निराहार रहना चाहिए। इस दिन वाणी पर संयम रखना चाहिए।
छठ पर्व पर हजारीबाग झील का सुंदर नजारा
आज अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस अवसर पर हजारीबाग झील का घाट सज धज कर तैयार है। आप भी देखें हजारीबाग झील का सुंदर नजारा। - 01:16 PM
पश्चिम बंगाल के गंगा घाटों पर राज्य सरकार ने की व्यवस्था
आस्था के महापर्व छठ पूजा के लिए पहला अर्घ्य आज दिया जाएगा। इस दौरान कोलकाता के 24, हावड़ा के 17 और राज्य के अन्य हिस्सों में गंगा घाटों पर करोड़ों की संख्या में छठ व्रती भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उमड़ेंगी।यूं तो देश में भगवान सूर्य के गई प्रख्यात मंदिर है, सभी का अपना महत्व हैं, लेकिन बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित देव सूर्य मंदिर का अपना इतिहास है। मंदिर को लेकर कई किंवदंतियां सुनने में आती है। कहते हैं इस सूर्य मंदिर को ध्वस्त करने की योजना औरंगजेब ने बनाई थी, लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी थी। छठ पर्व के दौरान यहां भव्य मेला लगता है। औरंगाबाद से 18 किलोमीटर दूर देव स्थित सूर्य मंदिर करीब सौ फीट ऊंचा है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण त्रेता युग में स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने किया