
दिवाली पर पटाखों से निकले धुएं ने शहर की हवा को जहरीला कर दिया था। राहत की बात यह है कि दो दिन बाद ही शहर की हवा फिर से साफ हो गई है। अब किसी तरह की चिंता की बात शहरवासियों के लिए नहीं है। चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (सीपीसीसी) की रिपोर्ट के अनुसार दिवाली के दिन बुधवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) 311 तक पहुंच गया था। शुक्रवार को वह कम होकर फिर से सामान्य स्थिति 127 पर आ गया। सेक्टर-22 का एक्यूआइ 127 दर्ज किया गया। 
इसी तरह से पेक सेक्टर-12 में दीवाली के दिन एक्यूआई 297 था जो कम होकर 140 पर आ गया। दिवाली से सप्ताह पहले भी एक्यूआई 100 से 150 के बीच था। 100 से 200 एक्यूआइ को मॉडरेट माना जाता है। अब फिर यह इसी स्थिति में आ गया है। पूरे शहर का एक्यूआई अब 150 तक है। दीवाली के दिन सेक्टर-22 में एक्यूआइ 311, सेक्टर-17 में 177 और पेक सेक्टर-12 का 297 था।
तापमान कम होने पर बढ़ेगी दिक्कत
भले ही दिवाली के दो दिन बाद ही एक्यूआइ मॉडरेट हो गया हो, लेकिन अब भी चिंता कम नहीं हुई है। तापमान गिरने से ठंड बढऩे के साथ ही प्रदूषण का स्तर बढऩे की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान प्रदूषण को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। तापमान गिरने के साथ ही इसका स्तर बढ़ सकता है। 15 नवंबर के आस-पास यह 200 से अधिक हो सकता है। हालांकि एक बरसात होते ही स्थिति बिल्कुल सामान्य हो जाएगी।
पराली या पटाखे नहीं वजह
चंडीगढ़ में एक्यूआइ मॉडरेट है, जबकि दिल्ली में दिवाली के दिन यह 900 तक पार कर गया था। मतलब हवा इतनी जहरीली कि खुली हवा में सांस लेना घातक होता है। दिवाली से दो दिन बाद ही एक्यूआइ मॉडरेट होना यह दर्शाता है कि पटाखे और पराली प्रदूषण बढऩे की मुख्य वजह नहीं है। दिल्ली में लगातार प्रदूषण की खराब स्थिति वाहनों से निकलता धुआं हो सकती है। इस कारण वहां एक्यूआइ लगातार खराब चल रहा है। पराली इसकी वजह होती तो असर चंडीगढ़ पर भी पड़ता। खुद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह यह बात कह चुके हैं।