नाराज उमेश को प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने मनाया, 60 बागी निष्कासित

महापौर का टिकट न मिलने से नाराज चल रहे उमेश अग्रवाल को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने मना लिया। वहीं, बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे साठ लोगों को भाजपा से निष्कासित कर दिया गया। 

प्रदेश अध्यक्ष के साथ हुई वार्ता के बाद उमेश महानगर दफ्तर पहुंचे। जहां महापौर प्रत्याशी सुनील उनियाल गामा ने अग्रवाल को गले लगाते हुए स्वागत किया। भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल टिकट न मिलने से नाराज चल रहे थे। इससे वह पार्टी कार्यक्रमों से लगातार दूरियां बनाए थे। 

प्रदेश अध्यक्ष ने उमेश से वार्ता कर पार्टी हित में कार्य करने का अनुरोध किया। प्रदेश अध्यक्ष की अपील पर उमेश मान गए। प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने कहा कि नाराजगी जैसी कोई बात नहीं है। अग्रवाल पारिवारिक कार्यों की वजह से व्यस्त थे। 

प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि सुबह अग्रवाल उनके यमुना कॉलोनी आवास पहुंचे थे। उनसे बैठकों में नहीं आने की वजह पूछी। जिस पर अग्रवाल ने बताया कि वह पारिवारिक कारणों से बैठकों में शिरकत नहीं कर पाए। प्रदेश अध्यक्ष से मिलने के बाद वह सीधे महानगर दफ्तर पहुंचे। जहां महापौर प्रत्याशी ने उनका स्वागत करते हुए चुनाव प्रचार में उतरने की अपील की।

भाजयुमो ने टोल फ्री नंबर लांच किया

भारतीय जनता युवा मोर्चा ने मेरा दून, मेरा सुझाव के लिए टोल फ्री नंबर लांच किया है। इस नंबर से स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को पार्टी से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। 

भाजयुमो के महानगर अध्यक्ष श्याम पंत और महामंत्री राजेश रावत ने बताया कि सार्वजनिक स्थानों के साथ ही कॉलेजों के सामने अभियान चलाकर इससे युवाओं को जोड़ा जाएगा। इस नंबर पर मिस कॉल देने से वह पार्टी महापौर प्रत्याशी सुनील उनियाल गामा से जुड़ जाएंगे और दून के विकास को सुझाव दे सकेंगे।

भाजपा ने किए 60 बागी निष्कासित

टिकट बटवारे से असंतुष्ट होकर निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ ताल ठोकने वाले नेताओं पर भाजपा सख्त हो गई है। ऐसे 60 नेताओं को छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। इनमें नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में चुनाव लड़ रहे नेताओं के अलावा उनके कुछ समर्थक भी शामिल हैं। 

ठीक लोकसभा चुनाव से पहले हो रहे नगर निकाय चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल हैं। पार्टी पर पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव का प्रदर्शन दोहराने का दबाव तो है ही, साथ ही प्रदेश सरकार के डेढ़ साल के कामकाज के आंकलन के लिहाज से भी ये चुनाव महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि पार्टी किसी तरह का जोखिम मोल नहीं लेना चाहती।