
अपना आगरा। ये वो शहर है जिसका डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। संगमरमरी हुस्न के ताज से जिसकी पहचान है। सात समंदर पार भी हम सीना ठोंककर कहते हैं कि हम ताजनगरी से हैं। उस शहर में हमने बहुत कुछ खो दिया।
प्रदूषण की मार झेल रहे शहर में ताज बचाने को औद्योगिक विकास का पहिया थमा, तो रोजगार के नए साधन भी नहीं पनप पाए। नया पाने की उम्मीद में हमने पुराना भी बहुत कुछ खो दिया। जिस ताज पर नाज है, उसे भी सहेजने में हम फेल हो रहे हैं। कई और ऐतिहासिक इमारतें भी हैं, जो परदेसियों को इस धरती पर खींच लाई हैं। हमें स्मार्ट सिटी मिलेगी, हेरिटेज सिटी का तमगा भी हमारे खाते में आएगा। …और तो और मेट्रो भी शहर का सफर काफी आसान कर देगी। बस जरूरत है तो हमें जागरूक होने की। जो खोया वह भले ही वापस न आए, लेकिन जो आना है, उसका बेहतर इस्तकबाल हो, ये संकल्प भी हमें भी लेना होगा। जागरण ने आंकड़ों के आइने से शहर की तस्वीर पेश करने की कोशिश की है।
मोहब्बत की इस निशानी पर पूरी दुनिया फिदा है। लेकिन यहां की अव्यवस्थाएं पर्यटकों को परेशान करती हैं। लपकों से लेकर अन्य समस्याओं तक अब पर्यटक भी परेशान हैं।