इस गांव में आस्था से ऊंचा कुछ नहीं, हर मकान एक ही मंजिली, कारण अद्भूत

आस्‍था आैर विश्‍वास का उदाहरण देखना हो तो पंजाब के बठिंडा जिले के गांव गांव कोटली साबो आएं। यहां न तो अवैध निर्माण का लेकर कोई सख्ती है आैर न ही कभी कोई कार्रवाई हुई है, लेकिन इस गांव में कोई अवैध निर्माण नहीं मिलेगा। किसी भी घर की छत पर चौबारा नहीं है। हर मकान सिर्फ एक मंजिली है। एक और खास बात यह कि सारे मकान गांव के मंदिर से कम ऊंचाई के है। छतों पर कोई निर्माण नहीं होता, यहां तक कि पानी की टंकियां भी नहीं लगाई जाती हैं। 

यह परंपरा 10-20 नहीं तीन सौ वर्षों से है। लोगों की मान्यता है कि गांव में मकान पर कोई निर्माण करेंगे तो कुछ न कुछ नुकसान हो जाएगा। यह भी विश्वास है कि कोई भी घर यहां पर बने बाबा अमेद पूरी के डेरे के गुबंद से भी ऊंचा नहीं होना चाहिए।

गांववासियों के अनुसार, उनके बुजुर्ग बताया करते थे कि करीब 300 साल पहले गांव के लोग विभिन्न समस्याओं से परेशान रहते थे। उसी समय यहां पर गांव जस्सी से बाबा अमेद पूरी आए थे। लोगों ने इन समस्याओँ का हल पूछा तो बाबा ने बताया कि गांव के लोग जब अपने घर के ऊपर किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं करेंगे तो उनको किसी भी प्रकार की बड़ी समस्या परेशान नहीं करेगी।

इसके बाद बाबा अमेद पूरी गांव में एक तरफ मुंह कर एक टीले पर बैठ गए। वहां पर आज बाबा की समाधि वाली जगह पर डेरा बना हुआ है। डेरे की ही छत गांव में सबसे ऊंची है। इसके बाद से ही घर की छत पर किसी प्रकार का निर्माण न करने की परंपरा चल पड़ी, जो आज भी कायम है। इसके साथ ही इस बात का पूरी तरह से ध्‍यान रखा जाता है कि कोई भी मकान या उसका कोई हिस्‍सा डेरे के गुंबद से नीचे रहे।

गांव में करीब 400 घर हैं। यहां की आबादी लगभग दो हजार है। किसी भी घर की छत्त पर चौबारा नहीं बना है। कुछ लोगों ने सीढिय़ों के ऊपर पानी की टंकी बनाई है, लेकिन यह भी डेरे के गुबंद से नीचे ही रखी गई है। गांव में बनाए गए डेरे में कहीं भी गेट नहीं है। डेरे को हर तरफ से खुला रखा गया है।

लोगों ने बताया कि गांव कालझरानी के एक सेठ लुद्दर राम ने अपने घर औलाद न होने पर डेरे के पास कुआं भी बनवाया था। कुछ लाभ न हुआ तो पता लगा कि कुआं दूसरे गांव की जमीन पर बन गया। इसके बाद दूसरा कुआं डेरे के पास कोटली साबो में ही बनाया। इससे सेठ लुद्दर राम के घर सब कुछ ठीक हो गया।

30 साल पहले बनाया था कच्चा कोठा तो होने लगा नुकसान

गांव के पूर्व सरपंच गुरदेव सिंह के अनुसार, यहां पर करीब 30 साल पहले किसी ने अपने घर की छत्त पर कच्चा कोठा बना लिया था। इसके बाद उस घर में नुकसान होने लगा। घर के लोग काफी परेशान रहने लगे। बाद में जब कच्चा कोठा तोड़ा गया तो सब कुछ ठीक हो गया। गांव निवासी सोमा खान ने बताया कि कोई भी शुभ कार्य करने से पहले डेरे में माथा टेका जाता है। साल में जितनी बार भी फसल होती है, वह काटने के बाद बेचने से पहले डेरे में लाई जाती है।