बड़ा खुलासा: बिहार में 90% कार्यालयों में महिलाओं का दर्द सुनने वाला कोई नहीं

सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालयों में काम करने वाली महिलाओं की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से विशाखा गाइडलाइन जारी होने के बावजूद 90 फीसद कार्यालयों में अब तक आंतरिक शिकायत समिति (आइसीसी) का गठन नहीं हो सका है। सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालयों में काम करने वाली महिलाओं की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से विशाखा गाइडलाइन जारी होने के बावजूद 90 फीसद कार्यालयों में अब तक आंतरिक शिकायत समिति (आइसीसी) का गठन नहीं हो सका है।  प्राइवेट संस्थानों की बात तो दूर सरकारी कार्यालयों व संस्थानों में भी इसका पालन नहीं हो रहा। इसके प्रति समाज कल्याण विभाग और महिला विकास निगम भी सजग नहीं है। विभाग और निगम के पास कोई आंकड़ा तक नहीं है कि किस कार्यालय में आइसीसी का गठन हुआ और शिकायत मिली या नहीं? ऐसी सूरत में कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडऩ की शिकार महिलाओं को थाना पुलिस और कोर्ट में जाने का अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।  इसका खुलासा हेल्पिंग ह्यूमन संस्था के स्टेट प्रेसिडेंट रंजीत कुमार द्वारा आरटीआइ (सूचना का अधिकार) के तहत मांगे गए जवाब से हुआ। रंजीत ने जब समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव से जानकारी मांगी तो उन्होंने पत्र को महिला विकास निगम में भेज दिया। आइसीसी पर निगरानी रखने की जिम्मेवारी महिला विकास निगम की है।  –– ADVERTISEMENT ––     मंजू वर्मा के पति की गिरफ्तारी नहीं होने पर SC नाराज, बिहार सरकार से मांगा जवाब यह भी पढ़ें क्या है विशाखा गाइडलाइन...  राजस्थान की भंवरी देवी के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला 1997 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। 2013 में अंतिम सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आदेश जारी किया था, जिसका नाम विशाखा गाइडलाइन दिया गया। इसके तहत केंद्र सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ लैंगिक उत्पीडऩ से संबंधित कानून को मंजूरी दी।   तकनीकी सहायक की 17 व लेखापाल पद की 20 नवंबर को होगी काउंसिलिंग यह भी पढ़ें किसी महिला को गलत तरीके से छूना, घूरना, यौन संबंध बनाने के लिए कहना, अश्लील इशारे व चुटकुले सुनाना, पॉर्न फिल्म या क्लिप दिखाना जैसी वारदातों को विशाखा गाइडलाइन के तहत यौन उत्पीडऩ माना गया। महिलाएं आरोपित कर्मी या अधिकारी के विरुद्ध शिकायत कर सकें, इसके लिए 10 या उससे अधिक कर्मचारी वाले दफ्तर में आइसीसी का गठन करना अनिवार्य है।  कई विभागों से नहीं मिला जवाब  आरटीआइ कार्यकर्ता रंजीत बताते हैं कि उन्होंने लगभग सभी सरकारी विभागों में आंतरिक एवं स्थानीय शिकायत समिति के गठन से संबंधित सूचना मांगी। विभागाध्यक्षों ने जिला मुख्यालय को पत्राचार कर सूचना उपलब्ध कराने के लिए लिखा। लेकिन, ज्यादातर कार्यालयों से सूचना प्राप्त नहीं हुई।  कुछ जगह से गोल-मोल जवाब मिले। वहीं, जवाब देने वाले अधिसंख्य लोक सूचना पदाधिकारियों ने कहा कि इस संबंध में सरकार या विभाग के स्तर से आदेश जारी नहीं हुआ है, इसलिए समिति का गठन नहीं किया गया।

प्राइवेट संस्थानों की बात तो दूर सरकारी कार्यालयों व संस्थानों में भी इसका पालन नहीं हो रहा। इसके प्रति समाज कल्याण विभाग और महिला विकास निगम भी सजग नहीं है। विभाग और निगम के पास कोई आंकड़ा तक नहीं है कि किस कार्यालय में आइसीसी का गठन हुआ और शिकायत मिली या नहीं? ऐसी सूरत में कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडऩ की शिकार महिलाओं को थाना पुलिस और कोर्ट में जाने का अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।

इसका खुलासा हेल्पिंग ह्यूमन संस्था के स्टेट प्रेसिडेंट रंजीत कुमार द्वारा आरटीआइ (सूचना का अधिकार) के तहत मांगे गए जवाब से हुआ। रंजीत ने जब समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव से जानकारी मांगी तो उन्होंने पत्र को महिला विकास निगम में भेज दिया। आइसीसी पर निगरानी रखने की जिम्मेवारी महिला विकास निगम की है।

क्या है विशाखा गाइडलाइन…

राजस्थान की भंवरी देवी के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला 1997 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। 2013 में अंतिम सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आदेश जारी किया था, जिसका नाम विशाखा गाइडलाइन दिया गया। इसके तहत केंद्र सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ लैंगिक उत्पीडऩ से संबंधित कानून को मंजूरी दी।

किसी महिला को गलत तरीके से छूना, घूरना, यौन संबंध बनाने के लिए कहना, अश्लील इशारे व चुटकुले सुनाना, पॉर्न फिल्म या क्लिप दिखाना जैसी वारदातों को विशाखा गाइडलाइन के तहत यौन उत्पीडऩ माना गया। महिलाएं आरोपित कर्मी या अधिकारी के विरुद्ध शिकायत कर सकें, इसके लिए 10 या उससे अधिक कर्मचारी वाले दफ्तर में आइसीसी का गठन करना अनिवार्य है।

कई विभागों से नहीं मिला जवाब

आरटीआइ कार्यकर्ता रंजीत बताते हैं कि उन्होंने लगभग सभी सरकारी विभागों में आंतरिक एवं स्थानीय शिकायत समिति के गठन से संबंधित सूचना मांगी। विभागाध्यक्षों ने जिला मुख्यालय को पत्राचार कर सूचना उपलब्ध कराने के लिए लिखा। लेकिन, ज्यादातर कार्यालयों से सूचना प्राप्त नहीं हुई।

कुछ जगह से गोल-मोल जवाब मिले। वहीं, जवाब देने वाले अधिसंख्य लोक सूचना पदाधिकारियों ने कहा कि इस संबंध में सरकार या विभाग के स्तर से आदेश जारी नहीं हुआ है, इसलिए समिति का गठन नहीं किया गया।