श्री गाँधी विद्यालय इण्टर कॉलेज ने जिलाविद्यालय निरीक्षक के आदेशानुसार वाल्मीकि जयंती धूमधाम से मनायी गई

सिधौली-सीतापुर ht: स्थानीय कस्बे के प्रतिष्ठित कॉलेज श्री गाँधी विद्यालय इण्टर कॉलेज ने जिलाविद्यालय निरीक्षक के आदेशानुसार वाल्मीकि जयंती धूमधाम से मनायी गई। जिसमे सभी छात्र,छात्राओं में भाग लिया कार्यक्रम का संचालन हिंदी के प्रखर प्रवक्ता राकेश पाण्डेय के द्वारा किया गया उसके बाद कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ0 के0के0 शुक्ल ने चित्र पर माल्यार्पण किया वही उनके कृतित्व व व्यकित्त्व के विषय मे छात्र,छात्राओ को बताया कि महर्ष‍ि वाल्मीकि को आद‍ि भारत का प्रमुख ऋष‍ि माना जाता है; सांस्कृत भाषा के आदि कवि होने का गौरव भी प्राप्‍त है वहीं महाकाव्य ‘रामायण’ के रचयिता के तौर पर भी जाने जाते हैं। सिधौली-सीतापुर/स्थानीय कस्बे के प्रतिष्ठित कॉलेज श्री गाँधी विद्यालय इण्टर कॉलेज ने जिलाविद्यालय निरीक्षक के आदेशानुसार वाल्मीकि जयंती धूमधाम से मनायी गई। जिसमे सभी छात्र/छात्राओं में भाग लिया कार्यक्रम का संचालन हिंदी के प्रखर प्रवक्ता राकेश पाण्डेय के द्वारा किया गया उसके बाद कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ0 के0के0 शुक्ल ने चित्र पर माल्यार्पण किया वही उनके कृतित्व व व्यकित्त्व के विषय मे छात्र/छात्राओ  को बताया कि महर्ष‍ि वाल्मीकि को आद‍ि भारत का प्रमुख ऋष‍ि माना जाता है/           सांस्कृत भाषा के आदि कवि होने का गौरव भी प्राप्‍त है वहीं महाकाव्य 'रामायण' के रचयिता के तौर पर भी जाने जाते हैं। उनके द्वारा रचित रामायण को सबसे ज्‍यादा सही माना गया है। शिक्षक राकेश पाण्डेय ने कहा कि वाल्‍मीक‍ि बनने से पूर्व उनका नाम रत्‍नाकर था और वह परिवार के भरण पोषण के लिए लोगों को लूटा करते थे। एक बार उनकी मुलाकात नारद जी से हो गई। जब वह उन्‍हें लूटने लगे तो नारद जी ने सवाल क‍िया क‍ि जिन परिवार के लिए वह ये काम कर रहे हैं, क्‍या वह उनके पापा में भागीदार बनेगा।जब रत्‍नाकर ने यह सुना तो वह अचरज में पड़ गए और तुरंत अपने पर‍िवार के पास जाकर ये सवाल क‍िया। उनको यह जानकर झटका लगा क‍ि कोई भी उनका अपना उनके पाप में हिस्‍सेदार नहीं बनना चाहता है। इसके बाद उन्‍होंने नारद जी से क्षमा मांगी और साथ ही राम-नाम के जप का उपदेश भी दिया। लेकिन वाल्‍मीक‍ि राम नाम नहीं बोल पा रहे थे जिस पर उन्‍होंने उनका 'मरा मरा' जपने की सीख दी। यही जाप उनका राम नाम हो गया और वह एक लुटेरे से महर्ष‍ि वाल्मीकि हो गए कॉलेज के समस्त  शिक्षकों ने पुष्प अर्पित किये।इस अवसर कार्यालय अधीक्षक पंकज अवस्थी शिक्षक डी0के0 सिंह,अमित त्रिपाठी, उमेश चौधरी,नीरज वर्मा,डी0 पी0 वर्मा,अनुज मिश्रा, हीरालाल,नवीन शर्मा,यश कुमार राठौर,माधवराम,रमाकांत शुक्ल, सुनील राव, मुख्तार,जागृत मिश्र अमित स्वप्निल,मौजूद रहे/

उनके द्वारा रचित रामायण को सबसे ज्‍यादा सही माना गया है। शिक्षक राकेश पाण्डेय ने कहा कि वाल्‍मीक‍ि बनने से पूर्व उनका नाम रत्‍नाकर था और वह परिवार के भरण पोषण के लिए लोगों को लूटा करते थे। एक बार उनकी मुलाकात नारद जी से हो गई। जब वह उन्‍हें लूटने लगे तो नारद जी ने सवाल क‍िया क‍ि जिन परिवार के लिए वह ये काम कर रहे हैं, क्‍या वह उनके पापा में भागीदार बनेगा।जब रत्‍नाकर ने यह सुना तो वह अचरज में पड़ गए और तुरंत अपने पर‍िवार के पास जाकर ये सवाल क‍िया।

उनको यह जानकर झटका लगा क‍ि कोई भी उनका अपना उनके पाप में हिस्‍सेदार नहीं बनना चाहता है। इसके बाद उन्‍होंने नारद जी से क्षमा मांगी और साथ ही राम-नाम के जप का उपदेश भी दिया। लेकिन वाल्‍मीक‍ि राम नाम नहीं बोल पा रहे थे जिस पर उन्‍होंने उनका ‘मरा मरा’ जपने की सीख दी। यही जाप उनका राम नाम हो गया और वह एक लुटेरे से महर्ष‍ि वाल्मीकि हो गए कॉलेज के समस्त शिक्षकों ने पुष्प अर्पित किये।इस अवसर कार्यालय अधीक्षक पंकज अवस्थी शिक्षक डी0के0 सिंह,अमित त्रिपाठी, उमेश चौधरी,नीरज वर्मा,डी0 पी0 वर्मा,अनुज मिश्रा, हीरालाल,नवीन शर्मा,यश कुमार राठौर,माधवराम,रमाकांत शुक्ल, सुनील राव, मुख्तार,जागृत मिश्र अमित स्वप्निल,मौजूद रहे