
अलीगढ़ में अशफाक और उसका 22 सदस्यों का परिवार लंकाधीश रावण के पुतले में आतिशबाजी जान फूंक कर पिछले 42 वर्षों से हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल कायम करता आ रहा है, अशफाक द्वारा तैयार किये गये लंकाधीश रावण, कुंभकरण व मेघनाथ के पुतले का दशहरा पर्व पर श्री राम स्वरूप द्वारा अंत किया जाएगा।
अलीगढ़ में लंकाधीश रावण का शुक्रवार को दशहरा पर्व पर अंत होगा, नुमाइश मैदान में रावण, कुंभकर्ण व मेघनाथ के पुतलों को अंतिम रुप दिया जा रहा है,,,,,इन पुतलों को तैयार कर रहे अशफाक बता रहे हैं की वह जिला बुलंदशहर के दानपुर निवासी हैं जो कि पिछले करीब 42 वर्षों से अपने दादा-परदादा द्वारा दशहरा पर्व पर रावण के पुतले को बनाए जाने वाले कार्य को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं, अशफाक और उसके साथ 22 सदस्यों का परिवार रहता है जो कि हर वर्ष रावण के पुतले को बनाने के लिए यहां आते हैं, अशफाक का कहना है कि इन पुतलों को बनाने का ठेका करीब 3,67,000 रूपये में लिया जाता है.
जिसमें तमाम तरह के सामान, आतिशबाजी और बिना धूप ताप देखें एक महीने की कड़ी मशक्कत के बाद रावण कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों को तैयार कर पाते हैं, अशफाक और उसका परिवार इन पुतलों को बनाकर बहुत खुश होता है उनका कहना है कि जिस तरह से हर तरफ हिंदू मुस्लिम को लेकर तनाव बना रहता है उसकी दूसरी ओर यहां हिंदू भाइयों के त्यौहार में इन पुतलों को बनाकर शरीक हो जाते हैं जिससे बहुत खुशी मिलती है,,,,वहीं आगे बताया कि इस बार रावण ठहाके लगाएगा, आंखों से अंगारे निकलेंगे,,,,अशफाक के काम की सराहना लोग करते हैं इसी लिए वह अपने परिवार के साथ अलीगढ़ के अलावा दिल्ली, गाजियाबाद, मथुरा, आगरा, एटा, मुंबई, मेरठ, इलाहाबाद, कानपुर जैसे बड़े शहरों में अपना और अपने परिवार का हुनर दिखा चुके हैं।