
मध्यप्रदेश में चुनावी जंग छिड़ चुकी है। अपने प्रत्याशियों के लिए मतदाता 28 नवंबर को अपना मत देंगे। रुझानों का दौर भी जोरों पर है सभी संस्थान अपनी तरफ से आंकड़े पेश कर रहे हैं। लेकिन मध्यप्रदेश की सियासत से एक मिथक जुड़ा हुआ है। यह मिथक अगर सच होता है तो शिवराज सिंह चौहान को थोड़ा परेशान होने की जरूरत है। 
मध्यप्रदेश की राजनीति में सिंहस्थ बेहद अहम है, साथ ही अहम है इससे जुड़ा मिथक। राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा अब गर्म हो गई है कि महाकाल की नगरी का यह कुंभ मौजूदा मुख्यमंत्री की कुर्सी छीन सकता है। भाजपा का चौथी बार मध्यप्रदेश की राजनीति में राज करने का सपना टूट सकता है।