
शेर और बाघ की दहाड़ भी जंगल सफारी में पर्यटकों को अपनी तरफ नहीं खींच पा रही है। पर्यटकों की कमी से जंगल सफारी प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सफारी प्रबंधन ने पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए अब नायाब तरीका ढूंढ़ा है। प्रबंधन ने जंगल सफारी की तरफ पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए राजधानी के सिनेमा घरों में अब शॉर्ट फिल्म दिखाने का निर्णय लिया है। 
शॉर्ट फिल्म प्रबंधन ने शॉर्ट फिल्म बनाने का जिम्मा मुंबई की एजेंसी को सौंपा है। एजेंसी द्वारा आधा घंटे तक जंगल सफारी का वीडियो बना लिया है। वन विभाग जल्द ही सिनेमाघरों के संचालकों से बैठकर दिखाना शुरू करेगी, जिससे पब्लिक का रुझान जंगल सफारी की तरफ खींचा जा सके।
ज्ञात हो कि छह नवंबर, 2016 को जंगल सफारी का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। एशिया सबसे बड़ा मानव निर्मित जंगल सफारी का केंद्र है। उस समय इसका इतना क्रेज था एक दिन में एक हजार से ज्यादा पर्यटक जंगल सफारी पहुंच रहे थे।
पर्यटकों की संख्या अधिक होने से बहुत से पर्यटकों को गेट के बाहर से ही लौटना पड़ता था, लेकिन वर्तमान में जंगल सफारी की स्थिति बदल गई है। यदि जनवरी 2018 की बात करें तो 31, 398 पर्यटक जंगल सफारी पहुंचे थे और अगस्त 2018 की बात करें तो पर्यटकों की संख्या आधे से ज्यादा घटकर 11, 596 यात्री ही जंगल सफारी पहुंचे हैं। पर्यटकों की संख्या में प्रतिमाह गिरावट दर्ज की जा रही है।
प्रचार-प्रसार का अभाव, में नहीं पहुंच रहे पर्यटक
वर्तमान में जंगल सफारी में 10 बाड़े बनकर तैयार हो गए हैं। बाड़े में व्हाइट टाइगर से लेकर शेर, बाघ, दरियाई घोड़ा, मगरमच्छ आदि कई वन्यजीव प्राणियों को रखा गया है, लेकिन जंगल सफारी का प्रचार-प्रसार न होने की वजह से पर्यटकों तक यह जानकारी नहीं पहुंच पाती है। जिस कारण पर्यटक जंगल सफारी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
जंगल सफारी का प्रचार-प्रसार करने के लिए ही वन विभाग द्वारा आधे घंटे की वीडियो सूटिंग की गई है। आधे घंटे के वीडियो से करीब एक या डेढ़ मिनट का वीडियो तैयार कर उसे सिनेमा घरों में दिखाया जाएगा। इसके साथ ही जंगल सफारी के वेटिंग हॉल में भी डाक्यूमेंट्री बनाई जाएगी। पर्यटक वेटिंग हॉल में बैठकर भी शेर और बाघों की दहाड़ सुन सकेंगे।
पर्यटकों के न पहुंचने से राजस्व का नुकसान
पर्यटकों की कमी से शासन को राजस्व की हानि हो रही है। विभाग को जनवरी में 53 लाख 64 हजार रुपये राजस्व मिला। अप्रैल में यह आंकड़ा घटकर 20 लाख 51 हजार दो सौ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि मई-जून में राजस्व थोड़ा बढ़ा, लेकिन जुलाई-अगस्त में फिर लुढ़क गया। प्रति माह करीब 50 फीसद राजस्व का नुकसान हो रहा है।