
पुरुषों ने समाज में महिलाओं को दोयम दर्जा दिया है। यही कारण है कि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के प्रति अपराध तथा उनका शोषण करने की भावना बलवती रही है। देश में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक दृष्टि से शोषण का शिकार बनते अक्सर देखा जाता है। हिंसा कैसी भी हो वह महिलाओं के मनोविज्ञान को प्रभावित करती है। भारत सरकार ने महिला सुरक्षा में एक नया अध्याय जोड़ते हुए सकारात्मक पहल की है। देश के सभी यौन अपराधियों का डेटाबेस बनाने का काम शुरू हुआ है और यह सिर्फ कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ही उपलब्ध कराया जाएगा।
फिलहाल इसमें उन 4,40,000 अपराधियों के नाम पंजीकृत हो चुके हैं जो दुष्कर्म, बाल यौन अपराध और यौन उत्पीड़न के दोषी सिद्ध हो चुके हैं। गृह मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार डेटाबेस इन अपराधियों के फोटो, पते, उंगलियों के निशान उपलब्ध कराता है वह भी किसी व्यक्ति के निजता को हनन किए बिना।
यह राष्ट्रीय डेटाबेस यौन अपराधों के मामलों को प्रभावी ढंग से ट्रैक करने और उनकी जांच में सहायता करेगा। इस राष्ट्रीय डेटाबेस को इन अपराधों की रोकथाम के लिए कारगर कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसमें अपराधी केवल तभी जोड़े जाएंगे जब इसकी सूचना दर्ज की जाती है और बाद में ऐसे मामलों में सजा भी सुनाई जाए। वैश्विक स्तर पर यौन अपराध को रिपोर्ट करने की दरों में अंतर है जैसे ब्रिटेन में लगभग पांच में से एक अपराध रिपोर्ट किया जाता है वहीं भारत में 50 में से एक अपराध।