मायावती ने भरी हुंकार, बीते 3 चुनावों में ऐसी रही है हाथी की चाल

छत्तीसगढ़ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का चुनावी आगाज हो गया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बिलासपुर में अजीत जोगी के साथ बड़ी रैली को संबोधित किया। कांग्रेस से अलग होकर अजीत जोगी ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ बनाई है। इन दोनों दलों ने चुनाव पूर्व गठबंधन कर लिया है। वैसे छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से बसपा यहां भाजपा-कांग्रेस के बाद तीसरी ताकत रही है। जानिए पिछले तीन चुनावों में बसपा का प्रदर्शन छत्तीसगढ़ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का चुनावी आगाज हो गया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बिलासपुर में अजीत जोगी के साथ बड़ी रैली को संबोधित किया। कांग्रेस से अलग होकर अजीत जोगी ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ बनाई है। इन दोनों दलों ने चुनाव पूर्व गठबंधन कर लिया है। वैसे छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से बसपा यहां भाजपा-कांग्रेस के बाद तीसरी ताकत रही है। जानिए पिछले तीन चुनावों में बसपा का प्रदर्शन -  2013 विधानसभा चुनाव: पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा को एक ही सीट मिली थी। भाजपा 90 में से 49 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सत्ता में बनी रही। कांग्रेस को 39 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। बसपा का वोट प्रतिशत 4.27 रहा था। भाजपा को 41.04 फीसदी तो कांग्रेस को 40.29 फीसदी वोट मिले थे।   बिलासपुर पहुंची मायावती, जोगी से साथ रैली को करेंगी संबोधित यह भी पढ़ें  2008 विधानसभा चुनाव: 50 सीटें जीतकर भाजपा सत्ता में बन रही। कांग्रेस को 38, तो बसपा को 2 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। भाजपा को 41.04 फीसदी वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस का वोट प्रतिशत 40.29 तो बसपा का 6.12 फीसदी था।  2003 विधानसभा चुनाव: मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद यह पहला मौका था जब छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हुए थे। बसपा ने 54 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए थे, जिनमें से 2 विधानसभा पहुंचे। पार्टी को 4.45 फीसदी वोट मिले थे। 90 में से 50 सीट जीतकर भाजपा सत्ता में आई थी।   सुकमा में नक्सलियों ने हर व्यक्ति से मांगे 800 रुपए यह भी पढ़ें    छत्तीसगढ़ में यह है माया की रणनीति   छत्तीसगढ़ में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी बसपा : मायावती यह भी पढ़ें  - मायावती करो या मरो के फॉर्मूले पर लड़ने के इरादे से मैदान में उतरी हैं। जनता कांग्रेस से गठबंधन के बाद भरोसा है कि अब उन्हें तीसरी ताकत बनने से कोई रोक नहीं सकता।  - बसपा को वोट प्रतिशत बढ़ाकर पार्टी की राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता भी बचानी है। लिहाजा छत्तीसगढ़ में मायावती कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।   रमन के खिलाफ अजीत जोगी की जमीन तैयार कर रही बहू ऋचा यह भी पढ़ें    रणनीति बदलने को मजबूर भाजपा-कांग्रेस   VIDEO : बैकुंठपुर में प्रसव के दौरान डस्टबिन में गिरा बच्चा, मौत यह भी पढ़ें  बसपा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के गठबंधन ने भाजपा व कांग्रेस दोनों को आरक्षित सीटों पर अपनी रणनीति बदलने को मजबूर कर दिया है। आरक्षित वर्ग की सीटों पर अब तक लगभग आधे-आधे का बंटवारा करने वाले कांग्रेस व भाजपा को लगने लगा है कि गठबंधन आरक्षित सीटों पर खेल बिगाड़ सकता है।  विधानसभा में 39 सीटें अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है। इस चुनाव में आरक्षित सीटों की बात करें तो बसपा व जकांछ के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। क्योंकि जकांछ के पास एक भी सीट नहीं है और बसपा की एकमात्र सीट जैजेपुर अनारक्षित वर्ग की है। विधानसभा चुनाव में इस बार आरक्षित वर्ग की यह सीटें ही किंग मेकर बनाने का कार्य कर सकती हैं।

2013 विधानसभा चुनाव: पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा को एक ही सीट मिली थी। भाजपा 90 में से 49 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सत्ता में बनी रही। कांग्रेस को 39 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। बसपा का वोट प्रतिशत 4.27 रहा था। भाजपा को 41.04 फीसदी तो कांग्रेस को 40.29 फीसदी वोट मिले थे।

2008 विधानसभा चुनाव: 50 सीटें जीतकर भाजपा सत्ता में बन रही। कांग्रेस को 38, तो बसपा को 2 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। भाजपा को 41.04 फीसदी वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस का वोट प्रतिशत 40.29 तो बसपा का 6.12 फीसदी था।

2003 विधानसभा चुनाव: मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद यह पहला मौका था जब छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हुए थे। बसपा ने 54 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए थे, जिनमें से 2 विधानसभा पहुंचे। पार्टी को 4.45 फीसदी वोट मिले थे। 90 में से 50 सीट जीतकर भाजपा सत्ता में आई थी।

छत्तीसगढ़ में यह है माया की रणनीति

– मायावती करो या मरो के फॉर्मूले पर लड़ने के इरादे से मैदान में उतरी हैं। जनता कांग्रेस से गठबंधन के बाद भरोसा है कि अब उन्हें तीसरी ताकत बनने से कोई रोक नहीं सकता।

 बसपा को वोट प्रतिशत बढ़ाकर पार्टी की राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता भी बचानी है। लिहाजा छत्तीसगढ़ में मायावती कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

रणनीति बदलने को मजबूर भाजपा-कांग्रेस

बसपा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के गठबंधन ने भाजपा व कांग्रेस दोनों को आरक्षित सीटों पर अपनी रणनीति बदलने को मजबूर कर दिया है। आरक्षित वर्ग की सीटों पर अब तक लगभग आधे-आधे का बंटवारा करने वाले कांग्रेस व भाजपा को लगने लगा है कि गठबंधन आरक्षित सीटों पर खेल बिगाड़ सकता है।

विधानसभा में 39 सीटें अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है। इस चुनाव में आरक्षित सीटों की बात करें तो बसपा व जकांछ के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। क्योंकि जकांछ के पास एक भी सीट नहीं है और बसपा की एकमात्र सीट जैजेपुर अनारक्षित वर्ग की है। विधानसभा चुनाव में इस बार आरक्षित वर्ग की यह सीटें ही किंग मेकर बनाने का कार्य कर सकती हैं।