
मणिमहेश यात्रा के अहम पड़ाव गौरीकुंड की अहमियत महिलाओं के लिए बेहद खास हैं । यहाँ पर जहां माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी। मणिमहेश यात्रा के दौरान इस स्थान पर केवल महिलाओं को ही जाने और स्नान करने की इजाजत हैं 
यह घटना उस समय की है जब भगवान शिव ने देवी गंगा का अहम तोड़ने के लिए उसको अपनी जटाओ में समा लिया था। उस समय जब गंगा ने भगवान शिव का स्पर्श किया तो वह पवित्रता को प्राप्त हो गई, यह बात माता पार्वती को अच्छि नहीं लगी कि अब वह भी भगवान शिव के ही साथ रहेंगी । इसलिए आज भी माता पार्वती के इस गौरी कुंड के निकट से भी यदि कोई व्यक्ति गंगाजल लेकर भी निकलता है तो इस कुंड का पानी उछाल मारने लगता है।
यहाँ की मान्यता हैं। यदि कोई महिला इस कुंड में गंदे वस्त्रों से स्नान करे या वस्त्र कुंड में फेंक दे तो कुंड का पानी सूख जाता हैं दावा है कि गंगाजल लेकर कोई श्रद्धालु कुंड के पास से होकर गुजरे तो कुंड का पानी उछाल मारने लगता हैं