
10 वर्षों से बारूद के ढेर पर बैठे पतरामपुर क्षेत्र के लोगों को अब दहशत से निजात मिल जाएगी। मिसाइलें नष्ट करने के लिए पुलिस चौकी से हजीरों स्थित फीका नदी क्षेत्र तक ले जाने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मिसाइल नष्ट करने वाले स्थान से एक किमी परिधि को नो मैंस लैंड जोन घोषित कर दिया गया है। यहां से मिसाइलों को विशेष दस्ते के साथ नष्ट करने वाले स्थल तक ले जाया जाएगा।
दिसंबर 2004 में हुए विस्फोट के बाद 555 मिसाइलें दबाने के बाद से पुलिस और प्रशासन ने चुप्पी साध ली थी। यहां मिसाइलें दबे होने से पांच गांवों में करीब 20 हजार की आबादी खौफ के साये में जी रही थी। 7 जनवरी 2015 को एनएसजी की टीम मिसाइलों को डिफ्यूज करने के लिए काशीपुर आई थी। यहां से मिसाइलों को पतरामपुर चौकी में दबाया गया था। वर्ष 2007 में पतरामपुर चौकी भवन के लोकार्पण के लिए आए तत्कालीन एसएसपी नीलेश आनंद भरणे के समक्ष ग्रामीणों ने यह मामला उठाया था।
10 वर्षों से बारूद के ढेर पर बैठे पतरामपुर क्षेत्र के लोगों को अब दहशत से निजात मिल जाएगी। मिसाइलें नष्ट करने के लिए पुलिस चौकी से हजीरों स्थित फीका नदी क्षेत्र तक ले जाने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मिसाइल नष्ट करने वाले स्थान से एक किमी परिधि को नो मैंस लैंड जोन घोषित कर दिया गया है। यहां से मिसाइलों को विशेष दस्ते के साथ नष्ट करने वाले स्थल तक ले जाया जाएगा।
दिसंबर 2004 में हुए विस्फोट के बाद 555 मिसाइलें दबाने के बाद से पुलिस और प्रशासन ने चुप्पी साध ली थी। यहां मिसाइलें दबे होने से पांच गांवों में करीब 20 हजार की आबादी खौफ के साये में जी रही थी। 7 जनवरी 2015 को एनएसजी की टीम मिसाइलों को डिफ्यूज करने के लिए काशीपुर आई थी। यहां से मिसाइलों को पतरामपुर चौकी में दबाया गया था। वर्ष 2007 में पतरामपुर चौकी भवन के लोकार्पण के लिए आए तत्कालीन एसएसपी नीलेश आनंद भरणे के समक्ष ग्रामीणों ने यह मामला उठाया था।