
नवरात्रि में मां दुर्गा के भक्त पूरे नौ दिनों तक उपवास रखकर सच्चे मन से मां की अराधना करते हैं। इन नौ दिनों में प्याज, लहसुन और अनाज खाने की सख्त मनाही होती है। इस खास दिनों में लोग सादे नमक की जगह सेंधा नमक का प्रयोग करते हैं। पर क्या माता रानी के भक्त जानते हैं आखिर क्यों अनाज छोड़कर इन नौं दिनों में सिर्फ फलाहार करने के लिए कहा जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की अहम वजह। 

वैज्ञानिक तर्क
हिंदू धर्म में एल्कोहल और मांसाहार का सेवन करना इन खास दिनों में बुरा माना जाता है। जिसके पीछे का वैज्ञानिक मत कहता है कि नवरात्र साल में दो बार मनाए जाते हैं। इस दौरान मौसम का मिजाज बदल रहा होता है इसलिए आपके आहार में इन चाजों का सेवन करने से आपकी सेहत खराब हो सकती है।
हिंदू धर्म में एल्कोहल और मांसाहार का सेवन करना इन खास दिनों में बुरा माना जाता है। जिसके पीछे का वैज्ञानिक मत कहता है कि नवरात्र साल में दो बार मनाए जाते हैं। इस दौरान मौसम का मिजाज बदल रहा होता है इसलिए आपके आहार में इन चाजों का सेवन करने से आपकी सेहत खराब हो सकती है।
आध्यात्मिक मत
नवरात्रों के 9 दिनों में व्रत रखने से माना जाता है कि व्यक्ति के तन और मन को शक्ति मिलती है। इतना ही नहीं ऐसा करने से आध्यात्मिक शुद्धिकरण भी होता है। कहा जाता है कि जो लोग इन खास दिनों में व्रत छोड़कर फलाहार करते हैं वो आध्यात्मिक रूप से खुद को ईश्वर के करीब महसूस करते हैं।
नवरात्रों के 9 दिनों में व्रत रखने से माना जाता है कि व्यक्ति के तन और मन को शक्ति मिलती है। इतना ही नहीं ऐसा करने से आध्यात्मिक शुद्धिकरण भी होता है। कहा जाता है कि जो लोग इन खास दिनों में व्रत छोड़कर फलाहार करते हैं वो आध्यात्मिक रूप से खुद को ईश्वर के करीब महसूस करते हैं।
आयुर्वेदिक
आयुर्वेदिक के अनुसार इन दिनों अंडा, मांस, अनाज, एल्कोहल, प्याज और लहुसन जैसी चीजों का सेवन करने से शरीर नकरात्मक शक्तियों को अवशोषित करने लगता है। खास बात यह है कि इस समय शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है जिसकी वजह से व्यक्ति जल्दी बीमार हो जाता है।
लहुसन और प्याज
आयुर्वेदिक के अनुसार इन दिनों अंडा, मांस, अनाज, एल्कोहल, प्याज और लहुसन जैसी चीजों का सेवन करने से शरीर नकरात्मक शक्तियों को अवशोषित करने लगता है। खास बात यह है कि इस समय शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है जिसकी वजह से व्यक्ति जल्दी बीमार हो जाता है।
लहुसन और प्याज
लहुसन और प्याज तामसिक भोजन में आते है। जो मन और शरीर दोनों को सुस्त बनाते हैं।इनसे बने भोजन को पचने में काफी समय लगता है।खासकर अंडा, मांस, मछली और सभी तरह के ऐसे भोजन या तरल पदार्थ जिससे नशा होता हो सब शामिल होते हैं। इसके अलावा, बासी खाने को भी तामसिक भोजन में शामिल किया जाता है। जिसे खाने से बचना चाहिए।
व्रत में क्या खाना चाहिए
व्रत के दौरान शरीर को नियमित खानपान के रुटीन से एक ब्रेक मिलता है। व्रत में व्यक्ति हल्का भोजन करता है जो पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के साथ आसानी से पच भी जाता है। लेकिन ठीक उसके विपरीत साबूत अनाज जैसे बाजरा, गेंहू इन्हें पचाना पेट के लिए थोड़ा मुश्किल होता है। जिसकी वजह से पाचन तंत्र धीमा पड़ जाता है। यही वजह है कि व्रत के दौरान लोग ज्यादा से ज्यादा डेयरी प्रॉडक्टस के साथ फल, जूस और हल्की सब्जियों का सेवन करना पसंद करते हैं। जो हल्के होने के साथ जल्दी पच भी जाते हैं।
व्रत के दौरान शरीर को नियमित खानपान के रुटीन से एक ब्रेक मिलता है। व्रत में व्यक्ति हल्का भोजन करता है जो पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के साथ आसानी से पच भी जाता है। लेकिन ठीक उसके विपरीत साबूत अनाज जैसे बाजरा, गेंहू इन्हें पचाना पेट के लिए थोड़ा मुश्किल होता है। जिसकी वजह से पाचन तंत्र धीमा पड़ जाता है। यही वजह है कि व्रत के दौरान लोग ज्यादा से ज्यादा डेयरी प्रॉडक्टस के साथ फल, जूस और हल्की सब्जियों का सेवन करना पसंद करते हैं। जो हल्के होने के साथ जल्दी पच भी जाते हैं।