
बुढ़ापे की लाठी.. इस मुहावरे का संबंध वृद्धावस्था में अपने माता-पिता की सेवा करने वाले पुत्र से है, लेकिन यहां जो बेटे पिता के बुढ़ापे में सहारा बनने वाले थे वे ही बेबस हो गए। किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे चार युवाओं को बचाने के लिए उनके पिता ही आगे आए हैं और अपनी किडनी देने का प्रस्ताव रखा है। 
गुरुनानक देव अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट ऑथोराइजेशन कमेटी की बैठक में पहुंचे इन बुजुर्गों ने अपने-अपने बेटों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी-अपनी किडनी देने का प्रस्ताव रखा। पठानकोट के विश्वकर्मा नगर निवासी 66 वर्षीय बोधराज ने कहा कि उनके 35 वर्षीय पुत्र योगेश कुमार की दोनों किडनियां फेल हैं। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि जल्द किडनी ट्रांसप्लांट करवा लें, अन्यथा कुछ भी हो सकता है।
इसी प्रकार शिव नगर कॉलोनी इस्लामाबाद अमृतसर निवासी 58 वर्षीय विजय कुमार ने कहा कि उनके 24 वर्षीय पुत्र कृष कुमार की जिंदगी खतरे में है। लंबा इलाज करवाने के बाद अब किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प है।
बटाला के भंडारी गेट के समीप रहने वाले 58 वर्षीय राम शिंगार ने भी यही मार्मिक अपील रखी कि उनका 37 वर्षीय बेटा सुरिंदर कुमार जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। वहीं, जालंधर के मुहल्ला रेहरवान निवासी 65 वर्षीय हरमेल सिंह भी अपने 22 वर्षीय बेटे को जिंदगी देने किडनी ट्रांसप्लांट कमेटी के सम्मुख प्रस्तुत हुए।
किडनी कमेटी के चेयरमैन डॉ. सुरिंदर पाल ने इन सभी लोगों की रिपोर्ट और दस्तावेज चेक किए। उन्होंने इन लोगों से कहा कि उनकी आयु ज्यादा है और इस आयु में किडनी ट्रांसप्लांट करने से उनकी जिंदगी जोखिम में पड़ सकती है। हालांकि इन लोगों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें अपनी जिंदगी की फिक्र नहीं। हमारे बेटे हमारी बुढ़ापे की लाठी हैं और यदि लाठी ही लडख़ड़ा गई तो फिर हमें संभालेगा कौन? इसके बाद नवरात्र की पावन बेला पर किडनी कमेटी ने इन चारों मामलों पर स्वीकृति की मुहर लगा दी।
सात केसों पर सुनवाई, सभी को मिली मंजूरी
किडनी कमेटी की बैठक में कुल सात केसों पर सुनवाई हुई और सभी को स्वीकृति मिली। इनमें बटाला के गांव दकोहा निवासी 53 वर्षीय सुच्चा सिंह ने अपने भतीजे 41 वर्षीय रघुविंदर सिंह, हरिकेपत्तन तरनतारन की 51 वर्षीय अमनप्रीत कौर ने अपनी बेटी 29 वर्षीय गुनीत कौर को किडनी देने की पेशकश रखी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।